रिचार्जेबल इमरजेंसी लाइट रिपेयरिंग कैसे की जाती है?

इमरजेंसी लाइट एक ऐसा इलेक्ट्रिक उपकरण है जिसका इस्तेमाल लगभग सभी घरों में घरेलू उपकरण के रूप में किया जाता है। कुछ साल पहले तक बहुत कम लोगों को emergency light के बारे में पता होता था लेकिन आज लगभग सभी लोग इसके बारे में जानते हैं और इसका इस्तेमाल भी करते हैं।

आपने भी इमरजेंसी लाइट का इस्तेमाल जरूर किया होगा और कभी-न-कभी वो खराब जरूर हुआ होगा। यदि आप एक इलेक्ट्रिकल मैकेनिक हैं और इलेक्ट्रिक रिपेयरिंग के काम में रुचि रखते हैं तो क्या आप जानते हैं कि इमरजेंसी लाइट रिपेयरिंग कैसे करें? क्या आप इमरजेंसी लाइट बनाने का तरीका जानते हैं?
how to repair a emergency light
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यदि आप खुद से emergency light repairing करना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि इमरजेंसी लाइट कैसे बनता है तो आज का ये पोस्ट जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम आपको एक सिंपल रिचार्जेबल इमरजेंसी लाइट रिपेयर करने की पूरी जानकारी हिंदी में देने जा रहे हैं। इस पोस्ट में आज हम आपको एक सिंपल how to repair a emergency light की पूरी जानकारी विस्तार में बताएँगे।


इमरजेंसी लाइट वायरिंग कनेक्शन डायग्राम हिंदी में

किसी भी इमरजेंसी लाइट की रिपेयरिंग करने के लिए आपको सबसे पहले emergency light wiring connection को समझना होगा और समझना होगा कि इमरजेंसी लाइट में सभी कंपोनेंट्स का आपस में कनेक्शन कैसे किया जाता है। How to make a emergency light को समझने के लिए आप हमारे निम्नलिखित emergency light wiring diagram को देख सकते हैं।

emergency light wiring connection diagram

ऊपर दिखाए गए emergency light wiring connection diagram में आप निम्नलिखित बातें देख सकते हैं।

  1. इस वायरिंग डायग्राम में हमने एक सिंपल emergency light battery charger चार्जिंग सर्किट डायग्राम का इस्तेमाल किया है जिसके बारे में हम पहले भी बता चुके हैं।
  2. इस चार्जिंग किट से हमने सिर्फ 4 वायर ही निकाला है जिसमें से 2 तार का कनेक्शन हमने चार्जिंग सॉकेट से किया है। बाकी के 2 तार बैटरी चार्जिंग के लिए निकला है जिसका कनेक्शन हमने बैटरी से किया है।
  3. चार्जिंग सॉकेट में एसी सप्लाई आता है इसलिए यहाँ (+) और (-) की समस्या नहीं है लेकिन चूँकि बैटरी में डीसी सप्लाई होता है इसलिए यहाँ (+) और (-) का ध्यान रखना जरूरी है और ऊपर दिखाए गए wiring a emergency light सर्किट डायग्राम के जैसे ही बैटरी का कनेक्शन करना है।
  4. इमरजेंसी लाइट के बल्ब के (-) को डायरेक्ट बैटरी के (-) से जोड़ देना है। इसके बाद सिर्फ बल्ब के (+) का कनेक्शन करना ही बच जायेगा।
  5. यदि बल्ब के (+) का कनेक्शन सीधे बैटरी के (+) से कर दिया जायेगा तो ये बल्ब हमेशा ही जलता रहेगा। इसलिए इमरजेंसी लाइट के वायरिंग डायग्राम में एक स्विच भी लगाया जाता है।
  6. इमरजेंसी लाइट के बल्ब के सर्किट में एक रेसिस्टेंस भी लगाया जाता है ताकि बल्ब फ्यूज न हो जाये।
  7. एक सिम्पल इमरजेंसी लाइट के स्विच में 3 विकल्प होता है। पहले में बल्ब ऑफ रहता है, दुसरे में बल्ब कम लाइट करता है और तीसरे में बल्ब ज्यादा लाइट करता है। इसलिए इमरजेंसी लाइट के switch में 3 पिन होता है।
  8. स्विच के कॉमन वाले वाले पिन का कनेक्शन बल्ब के (+) से कर दिया जाता है।
  9. स्विच के तीसरे पिन का कनेक्शन एक रेजिस्टेंस के माध्यम से बैटरी के (+) से कर दिया जाता है। ये रेजिस्टेंस आमतौर पर 5 ओह्म्स तक का होता है।
  10. स्विच के तीसरे पिन का कनेक्शन करने के बाद बल्ब जलने लगता है।
  11. लेकिन यदि आप चाहते हैं कि आपको बल्ब को थोडा कम रौशनी में जलाने के लिए एक और विकल्प मिले तो आप स्विच के दुसरे पिन के भी सीरीज क्रम में एक रेजिस्टेंस लगाकर उसका कनेक्शन बैटरी के (+) से कर दें।
  12. इस रेजिस्टेंस की वैल्यू पहले वाले रेजिस्टेंस की वैल्यू से ज्यादा होना चाहिए जिससे सर्किट में करंट के रास्ते में ज्यादा रूकावट हो और बल्ब कम लाइट करे। हालाँकि इस सर्किट में हमने 10 ओह्म्स के रेजिस्टेंस का उपयोग किया है लेकिन इस रेजिस्टेंस का चुनाव आप अपने इच्छानुसार भी कर सकते हैं।
  13. इतना कुछ कर लेने के बाद आपके इमरजेंसी लाइट का वायरिंग कनेक्शन पूरा हो जायेगा।


इमरजेंसी लाइट की रिपेयरिंग स्टेप-बाई-स्टेप कैसे करें ?

इमरजेंसी लाइट बहुत प्रकार का होता है और सभी का इमरजेंसी लाइट सर्किट अलग प्रकार का होता है और सभी की फैसिलिटी भी अलग-अलग होती है। लेकिन इस पोस्ट में आज हम आपको ऊपर दिए गए डायग्राम वाले एक सिम्पल emergency light repairing करने के बारे में बताएँगे जिसे समझने के बाद आप किसी भी प्रकार के इमरजेंसी लाइट को आसानी से रिपेयर कर लेंगे। एक सिम्पल इमरजेंसी लाइट में निम्नलिखित कंपोनेंट्स लगे होते हैं।

  1. बैटरी = पॉवर के लिए
  2. चार्जिंग किट = बैटरी को चार्ज करने के लिए
  3. एलईडी बल्ब = प्रकाश करने के लिए
  4. चार्जिंग होल्डर = चार्जिंग केबल लगाने के लिए
  5. 2 वे स्विच = बल्ब को 2 तरीके से ऑन या ऑफ करने के लिए

हमने इमरजेंसी लाइट के सभी मटेरियल के बारे में पहले ही विस्तार से बता दिया है यदि आपने अभी तक उस पोस्ट को नहीं पढ़ा है तो पहले उसे पढ़ लें। अब नीचे हम इमरजेंसी लाइट के कुछ सामान्य खराबियों और उसकी रिपेयरिंग के बारे में बता रहे हैं।


1) इमरजेंसी लाइट चार्ज नहीं हो रहा है क्या करें?

यदि आपके साथ भी emergency light not charging वाली प्रॉब्लम हो अर्थात वो चार्ज नहीं हो रहा हो तो नीचे के स्टेप्स को फॉलो करें।

  1. इमरजेंसी लाइट रिपेयरिंग के पूरी प्रक्रिया के दौरान वो चार्ज में लगा नहीं होना चाहिए।
  2. इमरजेंसी लाइट को खोलने से पहले उसके चार्जिंग केबल को मल्टीमीटर से रेजिस्टेंस विधि से चेक करें या फिर उस चार्जिंग केबल को दुसरे लाइट में लगाकर चेक कर लें।
  3. यदि चार्जिंग केबल सही हो तो अब इमरजेंसी लाइट के सभी स्क्रू को खोल दें।
  4. इमरजेंसी लाइट को खोलने के बाद सबसे पहले देखें कि कोई तार टूटा हुआ तो नहीं है। यदि कोई तार टूटा हुआ हो तो ऊपर दिए गए इमरजेंसी लाइट वायरिंग डायग्राम के अनुसार पहले उस टूटे हुए तार को सही जगह पर जोड़ दें।
  5. इसके बाद चेक करें कि चार्जिंग किट का कोई ट्रैक टूटा हुआ तो नहीं है, यदि कहीं पर भी ट्रैक टूटा हुआ हो तो उसे सही से शोल्डिंग कर दें।
  6. इसके बाद चेक करें कि चार्जिंग किट का कोई कॉम्पोनेन्ट जला हुआ तो नहीं है। यदि कोई कॉम्पोनेन्ट जला हुआ हो तो पहले उसे बदल दें।
  7. अब सबसे पहले मल्टीमीटर को एसी वोल्ट के रेंज पर रखकर चेक करें कि चार्जिंग किट तक बिजली का सप्लाई पहुँच रहा है या नहीं। यदि चार्जिंग किट तक सप्लाई नहीं पहुँच रहा हो तो चार्जिंग सॉकेट या चार्जिंग केबल ख़राब हो सकता है।
  8. यदि चार्जिंग किट तक सप्लाई पहुँच रहा हो तो अब आगे बढें।
  9. हो सकता है कि सिर्फ चार्जिंग एलईडी ख़राब हो और आपने समझ लिया कि इमरजेंसी लाइट चार्ज ही नहीं हो रहा है। इसलिए सबसे पहले चार्जिंग एलईडी और उसके रेसिस्टेंस को चेक कर लें।
  10. चार्जिंग एलईडी से दिक्कत न हो तो अब ब्रिज रेक्टिफायर के सभी डायोड को मल्टीमीटर से रेजिस्टेंस विधि से चेक कर लें। हालांकि, बहुत कम कंडीशन में ही डायोड खराब होता है।
  11. यदि यहाँ तक सब कुछ ठीक-ठाक हो तो अब सबसे अंत में emergency light charging circuit के पीएफ केपेसिटर को बदल दें।
  12. यदि पीएफ बदलने के बाद भी बैटरी चार्ज न हो रहा हो तो इसका मतलब इमरजेंसी लाइट का बैटरी ही खराब हो चुका है।


2) इमरजेंसी लाइट का बल्ब नहीं जल रहा है क्या करें?

90% इमरजेंसी लाइट के खराब होने का मतलब यही होता है कि वो काम नहीं कर रहा है अर्थात इमरजेंसी लाइट का बल्ब नहीं जल रहा है। यदि आपके साथ भी emergency light not working वाली प्रॉब्लम है तो नीचे के स्टेप को फॉलो करें।

  1. हो सकता है कि इमरजेंसी लाइट का बैटरी चार्ज ही नहीं हो रहा हो इसलिए सबसे पहले ऊपर बताये गए तरीके से emergency light charging system को सही कर लें।
  2. यदि इमरजेंसी लाइट का चार्जिंग सर्किट सही हो तो सबसे पहले मल्टीमीटर को 20 वोल्ट डीसी या इससे ज्यादा डीसी वोल्ट के रेंज पर रखकर emergency light batteries बैटरी पर वोल्ट चेक करें।
  3. बैटरी यदि 4 वोल्ट का है तो उस पर कम-से-कम 3.8 वोल्ट और ज्यादा-से-ज्यादा 4.3 वोल्ट होना चाहिए।
  4. यदि बैटरी पर कम वोल्ट बता रहा हो तो सबसे पहले बैटरी को चार्ज कर लें।
  5. यदि बैटरी ही खराब हो तो पहले इसे बदल दें।
  6. यदि बैटरी सही हो तो अब इमरजेंसी लाइट के जलने वाले एलईडी बल्ब पर वोल्टेज चेक कर लें, बल्ब पर यदि बैटरी के लगभग वोल्ट बता दे तो इसका मतलब ये हुआ कि बल्ब को सही सप्लाई मिल रहा है अर्थात बल्ब ही खराब है।
  7. ध्यान रहे कि बैटरी और बल्ब वाले कनेक्शन में (+) और (-) उल्टा हो जाने पर भी वो काम नहीं करेगा। इसलिए सबसे पहले ये तय कर लें कि इमरजेंसी लाइट का पूरा कनेक्शन सही से किया हुआ हो।
  8. यदि बल्ब तक सही से सप्लाई नहीं पहुँच रहा हो या एकदम ही सप्लाई न पहुँच रहा हो तो हो सकता है कि इसका तार कहीं से टूट गया हो, या स्विच खराब हो, या पॉवर रेजिस्टेंस खराब हो गया हो।
  9. तार की चेकिंग आप मल्टीमीटर से प्रतिरोध विधि से कर सकते हैं।
  10. स्विच की चेकिंग भी आप मल्टीमीटर से प्रतिरोध विधि से कर सकते हैं। या फिर चाहें तो स्विच के कनेक्शन को डायरेक्ट करके भी देख सकते हैं।
  11. अधिकांश इमरजेंसी लाइट में वन पोल स्विच ही लगा होता है अर्थात उस स्विच के माध्यम से सिर्फ एक कनेक्शन को ही on या off किया जाता है। इसलिए स्विच से जुड़े सभी तार को किसी भी सुचालक पदार्थ की मदद से (जैसे चिमटा या पेचकश से) आपस में शोर्ट कर दें। यदि ऐसा करने से बल्ब जल जाये तो इसका मतलब स्विच खराब है।
  12. यदि स्विच भी सही हो और इसके साथ ही ऊपर बताये गए सभी कंडीशन भी सही ही हो तो इसका मतलब बैटरी और बल्ब के बीच में लगा हुआ प्रतिरोध ही खराब है। आमतौर पर ये प्रतिरोध 10 ओह्म्स के अन्दर ही होता है।
  13. आप चाहें तो सिर्फ चेक करने के लिए स्विच के तरह ही इस प्रतिरोध के पिन को भी सॉर्ट करके देख सकते हैं। यदि प्रतिरोध को शोर्ट करने से बल्ब जल जाये तो इसका मतलब प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) खराब है जिसे आपको बदलना होगा।


नोट:- इमरजेंसी लाइट रिपेयरिंग करने के पूरी प्रक्रिया के दौरान वो चार्ज में नहीं लगा होना चाहिए। यदि आप चार्ज में लगाकर इमरजेंसी लाइट की रिपेयरिंग करेंगे तो आपको जोरदार झटका लग जायेगा जो आपके लिए खतरनाक हो सकता है।

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Low voltage होने के टॉप 5 वजह और उनके समाधान

शहर हो या गाँव, घर की बिजली में low voltage रहने की समस्या लगभग सभी customers को आती है। कम वोल्टेज होने के बहुत सारे वजह हो सकते हैं। बहुत मामलों में ये समस्या electricity company के service की गुणवत्ता में कमी की वजह से आती है तो अधिकांश मामलों में ये problem स्वयं customers के लापरवाही के वजह से आते हैं। तो आज हम आपको घर में low voltage रहने के इन्हीं दोनों case के बारे में विस्तारपूर्वक बताने जा रहे हैं।
Low voltage problem solution in Hindi
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1) Electricity Company की लचर व्यवस्था

बहुत मामलों में देखा गया है कि किसी इलाके में इतने ज्यादा वोल्टेज होते हैं कि वहां पर इस्तेमाल किये जाने वाले उपकरण बार-बार जलकर खराब हो जाया करते हैं, तो वहीँ बहुत सारे इलाकों में इतने voltage भी नहीं होते कि एक cfl या led bulb भी लगातार एक समान light में जलता रह सके।

यदि ये problem किसी ख़ास घर में आये तो ये उनके घर के wiring की खराबी हो सकती है, लेकिन यदि ये समस्या उस transformer area के लगभग सभी घरों में आये तो इसे बिजली कंपनी की लचर व्यवस्था की माना जा सकता है। हो सकता है कि उस एरिया के transformer पर जरूरत से ज्यादा consumers का connection लगाया गया हो या फिर ये भी हो सकता है कि कहीं किसी तरह के shorting की वजह से ये समस्या आ रही हो।


हालांकि, बिजली कंपनी अब खुद ही ऐसे समस्या समाप्त करने के लिए सभी जगहों पर मरम्मत का काम कर चला रही है। लेकिन suppose यदि आपको लगे कि आपके इलाके की समस्या बड़ी है और just repairing की जरूरत है तो आप अपने इलाके के कुछ consumers के साथ मिलकर अपने Power House या Electricity Office में इसके लिए application दे सकते हैं।

यदि संभव हो तो, इस आवेदन में आप अपनी समस्या को explain करके विस्तारपूर्वक जरूर लिखें। साथ ही यदि आपको अपने समस्या की वजह मालूम हो तो उसके बारे में भी विस्तार से जरूर बताएं, ताकि आपके आवेदन पर जल्द-से-जल्द काम शुरू करके आपके समस्या का निदान किया जा सके।

2) Consumers की लापरवाही

यदि आपके transformer area के सभी consumers के घरों में अच्छी voltage रहती हो लेकिन लगभग सिर्फ आपके ही घर में हमेशा low voltage रहता हो और सदैव उसमें उतार-चढ़ाव होते रहता हो तो बेशक ये समस्या आपके लापरवाही या आपके घर के वायरिंग में किसी तरह के कमी की वजह से आ रही होगी। ऐसे ही कुछ संभावित कारणों के बारे में नीचे विस्तारपूर्वक बताया जा रहा है।

i) Electric Pole पर connection wire के बीच carbonn/air gap का बन जाना

अधिकांश मामलों में देखा गया है घर में कम वोल्टेज होने की समस्या इलेक्ट्रिक पोल पर से ही होती है लेकिन अनजाने में लोग अपने घर की वायरिंग और अर्थिंग को खोलकर check करने लगते हैं कि कहीं इसी से तो समस्या नहीं आ रही है। दरअसल, बरसात और धूल-कण की वजह से पोल पर हमारे मेन तार पर कार्बन बन जाता है जिस वजह से low voltage की समस्या आने लगती है।


इसलिए यदि आपके साथ भी ये समस्या आये तो सबसे पहले electric pole पर से अपने तार को उतार लें और फिर उसे छीलकर तब सबसे अंत में उसे पोल के तार पर चढ़ाएं।

Note:- आज के समय में अब बिजली कंपनी के तरफ से ही इलेक्ट्रिक पोल पर सभी लोगों के तार को fix कर दिया जाता है। यदि आपके pole पर भी तार को फिक्स कर दिया गया हो तो शायद इस वजह से आपको समस्या न आ रही हो।

ii) Weak Earthing की वजह से

बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जो अपने बिजली कनेक्शन के लिए सही से अर्थिंग नहीं लगवाते हैं और जल्दबाजी में किसी भी तरह से कमजोर अर्थिंग लगाकर अपना काम निबटा लेते हैं। साथ ही बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने घर के piller में ही earthing का connection कर देते हैं। यदि आपके घर में भी low voltage की समस्या आती हो तो उसका एक सबसे बड़ा reason ये भी हो सकता है।

यदि आपने धरती में ही अर्थिंग लगाया है लेकिन सही से नहीं लगाया है तो मैं आपको recommend करूँगा कि सबसे पहले एक मजबूत और टिकाऊ अर्थिंग लगायें। भले ही इसमें आपका कुछ time और money खपत हो, लेकिन ये आपके बिजली कनेक्शन के future के लिए best रहेगा और आप बेफिक्र होकर बिजली का इस्तेमाल कर सकेंगे।


लेकिन यदि आपने अपने घर के पिलर में अर्थिंग लगाया हुआ है तो मेरी यही सलाह है कि आप इसे पिलर से हटाकर ऊपर बताये गए तरीके से धरती से ही इसका connection करें। Because, यदि आप piller में अपना अर्थिंग लगाते हैं तो इससे न सिर्फ आपके घर में कम voltage की समस्या आती है बल्कि आपके घर में करंट के झटके आने की समस्या भी हो सकती है।

iii) ज्यादा उपकरण के इस्तेमाल की वजह से

किसी भी घर की वायरिंग सामान्य तौर पर बल्ब और पंखे जैसे ही बिजली की कम खपत करने वाले उपकरण को ध्यान में रखकर किया जाता है। लेकिन बदलते समय के साथ-साथ लोग progress करते जाते हैं और अपने घर में ज्यादा power की खपत करने वाले उपकरण लगाते जाते हैं।

लेकिन आपके घर की wiring चूंकि आपके छोटे जरूरतों को ध्यान में रखकर किया हुआ होता है इसलिए जैसे-जैसे आप इस पर ज्यादा उपकरणों का load बढ़ाते जाते हैं वैसे-वैसे आपके घर की वायरिंग पर दबाव बढ़ता जाता है जिस वजह से आपके घर के voltage कम हो जाते हैं। इसलिए जब भी आप ज्यादा power की खपत करने वाले किसी new device को खरीदें तो उसके लिए अलग से वायरिंग करवा लें या फिर पुराने wiring में जरूरत के अनुसार changing जरूर करवा लें।

iv) Wire Quality में कमी की वजह से

बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जो महंगे material लगाकर अपने घर की वायरिंग तो करवा लेते हैं लेकिन तार के मामले में थोडा पिछड़ जाते हैं।

ऐसे लोग जानते हुए भी गलत तार खरीद लेते हैं जो आगे चलकर उनके लिए परेशानी की वजह बन जाती है। आगे आप तार से सम्बंधित ही कुछ important बातें जान सकते हैं जिस वजह से घर में low voltage की समस्या को face करना पड़ता है।


a) Copper के बजाये Aluminium की तार से घर की वायरिंग करना

हालांकि अधिकांशतः इस वजह से low voltage की समस्या नहीं ही आती है लेकिन कुछ मामलों में ऐसा हो भी जाता है। यदि आप एल्युमीनियम के तार से अपने घर की वायरिंग करवाते हैं और wiring किया हुआ कुछ साल बीत जाए तो carbon और air gap की वजह से आपको कम वोल्टेज की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि आप पहली बार में ही तांबा के तार से अपने घर की वायरिंग करवाते हैं तो ये आपके लिए सबसे best रहेगा और भविष्य में आपको शायद ही कभी परेशानी का सामना करना पड़े।

b) पतले तार से wiring करवाना

जिस समय लोग वायरिंग कराते हैं उस time उनकी जरूरत कम होती है और वो पतले तार से भी वायरिंग करा लेते हैं। लेकिन आगे जाकर जब उनकी जरूरत बढ़ती जाती है तब भी वो पुराने wiring पर ही सभी उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में वायरिंग में इस्तेमाल किये गए तार पर दबाव बढ़ता है जिस वजह से घर में लो वोल्टेज की समस्या आने लगती है। इतना ही नहीं, यदि जल्द-से-जल्द इसका solution न किया जाये तो short-circuit की वजह से घर में आग लगने की भी संभावना बढ़ जाती है।


इसलिए हमारी personal advise यही है कि पतले wire से वायरिंग करना गलत नहीं है, लेकिन इस बात का पूरा ध्यान रखें कि आप जिस वायर का इस्तेमाल कर रहे हैं वो उससे जरूरत से ज्यादा पतला न हो। साथ ही, यदि future में कभी आप ज्यादा उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं तो अपने उस उपकरण के खपत को देखते हुए अपने wiring में जरूरी updation जरूर कर लें।

c) तार में हद से ज्यादा insulator tape का इस्तेमाल करना

वायरिंग में इस्तेमाल किये गए तार कॉपर के हों या एल्युमीनियम के, कोशिश करें कि इनमें ज्यादा कटिंग न किया जाये। जाहिर-सी बात है कि जिस point पर तार को काटा जाता है वहां पर दूसरा तार जोड़ा भी जाता है। लेकिन यहाँ समस्या ये है कि यदि दोनों तार को मजबूती से गाँठ न बनाया जाए तो उस point पर sparking की problem आने लगती है और वहां कार्बन बन जाता है जिस वजह से घर में कम voltage आने लगता है।

इतना ही नहीं, बहुत मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि तार में सही से गाँठ लगा दिया जाता है लेकिन फिर भी कुछ साल बाद वो गाँठ कमजोर हो जाता है और वहां स्पार्किंग होने लगता है। चूंकि वायरिंग बार-बार नहीं किया जाता है, इसलिए मैं आपको recommend करूँगा कि बेवजह तार में काट-छांट करके टेप का इस्तेमाल न करें। जहाँ पर बहुत ज्यादा जरूरत हो वहीँ पर ऐसा करें।

यदि वायरिंग करते समय कभी एक bundle का तार ख़त्म हो जाए तो वहां पर दूसरे बंडल का तार जोड़ने के लिए tape का इस्तेमाल करना गलत नहीं होता है लेकिन यहाँ भी इस बात का पूरा ध्यान रखें कि उन दोनों तार में गाँठ मजबूती से दिया गया हो और साथ ही वहां पर टेप भी मजबूती से लपेटा गया हो।


आपको हमारी ये जानकारी कैसी लगी, कमेंट करके हमें जरूर बताएं और यदि अच्छी लगी हो तो इसे share जरूर करें। हमारे ऐसे ही पोस्ट के नोटिफिकेशन अपने ईमेल पर पाने के लिए हमें सब्सक्राइब करना भी न भूलें।

इलेक्ट्रिक बोर्ड की वायरिंग कैसे करे; हिंदी में जानकारी

आपने अपने घर में बिजली का कनेक्शन जरूर लिया होगा और उसपर बहुत सारे बिजली के उपकरण का इस्तेमाल भी करते होंगे। लेकिन यदि आपने अपने घर में वायरिंग नहीं करवाया है और जैसे-तैसे बंदोबस्त करके बिजली का उपयोग कर रहे हैं तो ये आपके लिए बिलकुल भी सही नहीं होगा।

बिना वायरिंग कराये यदि आप बिजली का उपयोग कर रहे हैं तो कब ये आपके लिए खतरनाक साबित हो जायेगा ये कहना ज्यादा मुश्किल नहीं है। बहरहाल, किसी भी प्रकार के अनहोनी से बचने के लिए आपको अपने घर का हाउस वायरिंग जरूर करवाना चाहिए।

यदि आप सक्षम हैं तो अपने हाउस वायरिंग के लिए किसी अच्छे इलेक्ट्रीशियन से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन यदि आप खुद इलेक्ट्रिकल में रुचि रखतें हैं और इससे सम्बंधित थोडा-बहुत काम कर लेते हैं तो हमारे पोस्ट्स को पढ़कर आप खुद से भी अपने घर में हाउस वायरिंग कर सकते हैं।

लेकिन हाउस वायरिंग शुरू करने से पहले आपको इलेक्ट्रिक बोर्ड की वायरिंग करने के बारे में पता होना चाहिए। आपको इलेक्ट्रिक बोर्ड बनाने का तरीका पता होना चाहिए। इलेक्ट्रिक बोर्ड बनाने की विधि पता होना चाहिए, पता होना चाहिए कि इलेक्ट्रिक बोर्ड कैसे बनता है, इलेक्ट्रिक बोर्ड वायरिंग कैसे किया जाता है और पता होना चाहिए कि इलेक्ट्रिक बोर्ड कनेक्शन कैसे करे?

electric board ki wiring kaise kare

यदि आपको पता नहीं है कि इलेक्ट्रिक बोर्ड कैसे बनाते हैं और आप जानना चाहते हैं कि इलेक्ट्रिक बोर्ड वायरिंग कैसे करे तो इलेक्ट्रिक बोर्ड इन हिंदी वाला ये पोस्ट जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम इलेक्ट्रिक बोर्ड बनाने के तरीके के बारे में हिंदी में बताने जा रहे हैं। इस पोस्ट में आज हम आपको इलेक्ट्रिक बोर्ड कैसे बनाये की पूरी जानकारी स्टेप बाय स्टेप हिंदी में देने जा रहे हैं।

इलेक्ट्रिक बोर्ड बनाने का तरीका स्टेप-बाई-स्टेप हिंदी में

इलेक्ट्रिक बोर्ड फिटिंग करने के लिए सबसे पहले अपने जरूरत के अनुसार सारे इलेक्ट्रिक बोर्ड कंपोनेंट्स खरीद लें और फिर इसके बाद सभी वायरिंग टूल्स को भी जमा कर लें। जब सभी हाउस वायरिंग टूल्स और इलेक्ट्रिक बोर्ड मटेरियल आपके पास मौजूद हो तो बोर्ड फिटिंग करने के लिए निम्नलिखित बातों को फॉलो करें।

  1. यदि खरीदे गए बोर्ड मटेरियल पर धुल-कण पड़ा हो तो सबसे पहले सभी मटेरियल और इलेक्ट्रिक बोर्ड की सफाई कर लें।
  2. बोर्ड में आप कौन-कौन-सा और कितना मटेरियल लगायेंगे, इस आधार से सबसे पहले electric board शीट की कटिंग करने के लिए उस शीट पर पेंसिल से निशान बना दें।
  3. इसके बाद अपने औजारों की सहायता से बोर्ड शीट की कटिंग कर दें।
  4. बोर्ड शीट की कटिंग करने के बाद स्क्रू लगाने के लिए भी शीट पर पेंसिल से निशान बना लें।
  5. अब इस निशान पर छेद कर दें।
  6. आप चाहें तो मार्केट से कटिंग किया हुआ बोर्ड भी खरीद सकते हैं, लेकिन उसमें शायद आपके जरूरत के अनुसार कटिंग किया हुआ नहीं मिलेगा।
  7. इलेक्ट्रिक बोर्ड शीट की कटिंग पूरा हो जाने के बाद उसमें सभी बोर्ड मटेरियल को फिट कर दें।
  8. बोर्ड मटेरियल को फिट करने के बाद उसके छेद में ऊपर से अन्दर की ओर स्क्रू लगा दें।
  9. इस स्क्रू को पेचकश या टेस्टर की सहायता से टाइट करके कस दें।
  10. इसी प्रकार से एक-एक करके सारे कंपोनेंट्स को बोर्ड में फिट कर दें।
  11. अब नीचे बताये जा रहे तरीके से सभी कंपोनेंट्स का बोर्ड वायरिंग के माध्यम से आपस में कनेक्शन कर दें।


इलेक्ट्रिक बोर्ड वायरिंग डायग्राम इन हिंदी

ऊपर आपने electric board बनाने की विधि के बारे में अर्थात बोर्ड फिटिंग करने के बारे में जान लिया है और अब बोर्ड के सभी मैटेरियल्स का आपस में कनेक्शन करना ही बाकी रह गया है। इलेक्ट्रिक बोर्ड की वायरिंग को समझने के लिए आप निम्नलिखित electric board wiring diagram फोटो का सहारा ले सकते हैं।

electric baord wiring diagram

ऊपर electric board circuit diagram इमेज में आप एक आदर्श इलेक्ट्रिक बोर्ड की आंतरिक संरचना को देख सकते हैं। साथ ही इस डायग्राम में आप बोर्ड के डिजाईन से लेकर बोर्ड का कनेक्शन तक को आसानी से समझ सकते हैं। लेकिन फिर भी यदि आपको बोर्ड का कनेक्शन समझ में न आये तो चलिए सबसे पहले बोर्ड का डिजाईन को समझ लेते हैं।

  1. हमने इलेक्ट्रिक बोर्ड का एक शीट लिया है और उसके क्षेत्र को भूरे रंग से दर्शा दिया है।
  2. बोर्ड शीट के अन्दर हमने electric board के सभी मटेरियल को कस दिया है। आप अपने बोर्ड में उतने ही मटेरियल को कसें, जितने की आपको जरूरत हो।
  3. बोर्ड के सभी कंपोनेंट्स के क्षेत्र को हमने ग्रे (स्लेटी) रंग से दर्शाया है।
  4. Hot line (गर्मी के तार) और इसके कनेक्शन को हमने लाल रंग से दर्शाया है।
  5. Cold Line (ठंडी के तार) और इसके कनेक्शन को हमने काला रंग से दर्शाया है।
  6. भू-तार और इसके कनेक्शन को हमने हरा रंग से दर्शाया है।
  7. स्विच में सप्लाई हमने गर्मी (लाल रंग के तार) का दिया है लेकिन इसके आउटपुट को हमने नीला रंग दे दिया है ताकि आपको स्विच के इनपुट और आउटपुट को समझने में आसानी हो।
  8. आपकी सुविधा के लिए हमने electric board वायरिंग डायग्राम में सभी मटेरियल का नाम भी लिख दिया है।
  9. इलेक्ट्रिक बोर्ड के किसी भी मटेरियल में (+) और (-) नहीं होता है। अर्थात किसी भी मटेरियल के किसी भी पिन में गर्मी और किसी भी पिन में ठंडी का सप्लाई दे दिया गया है।
  10. अच्छे से इलेक्ट्रिक बोर्ड वायरिंग करने के लिए नीचे दी जा रही जानकारी भी आप पढ़ सकते हैं।


इलेक्ट्रिक बोर्ड की वायरिंग कैसे करे?

ऊपर हमने इलेक्ट्रिक बोर्ड वायरिंग डायग्राम दे दिया है जिसकी सहायता से आप अपने electric board की पूरी वायरिंग कर सकते हैं। लेकिन यदि उस डायग्राम में कुछ समझ न आया हो तो नीचे आप उस वायरिंग डायग्राम को विस्तारपूर्वक समझ सकते हैं। यदि वो डायग्राम आपको समझ आ गया हो तो भी आगे जरूर पढ़ें क्योंकि आगे आप बहुत कुछ नई बात जानेंगे।

1) इलेक्ट्रिक बोर्ड में फ्यूज का कनेक्शन कैसे करे?

फ्यूज के 2 पिन में से एक पिन में इनपुट गर्मी का कनेक्शन होगा और दुसरे पिन से गर्मी का आउटपुट मिलेगा जिसे आगे की वायरिंग में गर्मी ही माना जायेगा। बस एक बात का ध्यान रहे कि सप्लाई वाले गर्मी को सिर्फ फ्यूज में ही जोड़ना है ताकि उस बोर्ड का पूरा लोड फ्यूज पर पड़ सके। साथ ही ध्यान रहे कि बोर्ड तक जो इनपुट गर्मी और ठंडी आता है वो इलेक्ट्रिक मीटर से होकर आता है।

2) इलेक्ट्रिक बोर्ड में गर्मी का कनेक्शन कहाँ किया जायेगा?

इलेक्ट्रिक बोर्ड में गर्मी के तार का कनेक्शन सिर्फ फ्यूज से ही किया जायेगा। लेकिन फ्यूज के आउटपुट को भी गर्मी ही माना जाएगा।

3) फ्यूज के आउटपुट का कनेक्शन कहाँ किया जाता है?

ऊपर हमने बताया था कि बिजली के मेन सप्लाई के गर्मी के तार को सिर्फ फ्यूज के साथ ही जोड़ा जायेगा। तो अब सवाल ये उठता है कि फ्यूज के आउटपुट गर्मी का कनेक्शन कहाँ किया जायेगा? फ्यूज के आउटपुट गर्मी का कनेक्शन इंडिकेटर और सिर्फ स्विच से ही किया जायेगा। यहाँ ध्यान रहे कि स्विच में ठंडी के तार का भी कनेक्शन किया जा सकता है लेकिन गर्मी का कनेक्शन करने के पीछे कुछ बातें हैं जिसके बारे में हम अगले पोस्ट में बात करेंगे।

4) इलेक्ट्रिक बोर्ड में इंडिकेटर का कनेक्शन कैसे करें?

इंडिकेटर के एक पिन में इनपुट गर्मी और दुसरे पिन में इनपुट ठंडी का कनेक्शन किया जाता है। लेकिन एक बात का ध्यान रहे कि यहाँ इनपुट गर्मी का मतलब फ्यूज के आउटपुट गर्मी का है। आगे हम जहाँ भी इनपुट गर्मी का उल्लेख करेंगे उन सभी का मतलब भी यही होगा।

5) इलेक्ट्रिक बोर्ड में ठंडी का कनेक्शन कैसे करें?

ठंडी के कनेक्शन को कॉमन रखा जाता है अर्थात सभी उपकरणों में ठंडी का डायरेक्ट कनेक्शन कर दिया जाता है। साथ ही इंडिकेटर में भी ठंडी का कनेक्शन किया जाता है क्योंकि ये भी एक प्रकार से उपकरण ही होता है। Electric board में ठंडी के तार की वायरिंग बल्ब होल्डर, 2 पिन सॉकेट और 5 पिन सॉकेट में भी किया जाता है लेकिन रेगुलेटर में नहीं किया जाता है।

6) इलेक्ट्रिक बोर्ड में बिजली तार का कनेक्शन कैसे करें?

ऊपर के इलेक्ट्रिक बोर्ड सर्किट डायग्राम और फ्यूज तथा इंडिकेटर के वायरिंग से ही समझा जा सकता है कि इनपुट बिजली के गर्मी का तार फ्यूज में और ठंडी का तार इंडिकेटर में लगेगा। हालांकि आमतौर पर वायरिंग में गर्मी और ठंडी के कनेक्शन उल्टा हो जाने पर हमें कोई फर्क महसूस नहीं होता लेकिन अपने अगले पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसी बातें बतायेंगे जिससे आपको गर्मी और ठंडी के कनेक्शन में उलटे-सीधे का फर्क पता चल जाएगा।

7) इलेक्ट्रिक बोर्ड में स्विच का कनेक्शन कैसे किया जाता है?

स्विच में गर्मी का कनेक्शन किया जाता है। सभी स्विच के एक पिन में गर्मी का कनेक्शन होगा और बाकी के एक-एक पिन का कनेक्शन 2 पिन सॉकेट, 5 पिन सॉकेट, बल्ब होल्डर, फेन रेगुलेटर, इत्यादि से किया जायेगा।

8) पंखा रेगुलेटर का कनेक्शन कैसे किया जायेगा?

फेन रेगुलेटर का कनेक्शन करने में कुछ कंडीशन है जिसके बारे में हम पहले ही पोस्ट लिख चुके हैं। आप वो पोस्ट चेक कर सकते हैं या फिर आप ऊपर पेश किये गए electric board wiring diagram में भी देख सकते हैं।


9) इलेक्ट्रिक बोर्ड में बल्ब होल्डर का कनेक्शन कैसे करें?

बल्ब होल्डर के एक पिन का कनेक्शन भी किसी एक स्विच के आउटपुट से किया जाएगा और दुसरे पिन का कनेक्शन ठंडी से किया जायेगा।

10) इलेक्ट्रिक बोर्ड में 2 पिन सॉकेट का कनेक्शन कैसे करे?

2 पिन सॉकेट के एक पिन का कनेक्शन किसी भी एक स्विच के आउटपुट से किया जायेगा और दुसरे पिन का कनेक्शन ठंडी से किया जायेगा।

11) इलेक्ट्रिक बोर्ड में 5 पिन सॉकेट का कनेक्शन कैसे किया जायेगा?

5 पिन सॉकेट में 5 होल होता है जिसमें से 2 होल गर्मी का, 2 होल ठंडी का और बाकी का 1 होल भू-तार का होता है। 2 होल का कनेक्शन ठन्डी के तार से किया जायेगा और बाकी के 2 होल का कनेक्शन किसी भी एक स्विच से कर दिया जायेगा। इसके बाद सबसे ऊपर वाले होल का कनेक्शन भू तार से किया जायेगा। थ्री पिन सॉकेट का कनेक्शन भी इसी प्रकार से किया जायेगा।


12) इलेक्ट्रिक बोर्ड में भू तार का कनेक्शन कैसे होगा?

भू तार का कनेक्शन सिर्फ 5 पिन सॉकेट और 3 पिन सॉकेट के सबसे ऊपरी पिन के साथ ही किया जाता है। इसके अतिरिक्त और कहीं भी भू तार का कनेक्शन नहीं किया जाता है।

13) इलेक्ट्रिक बोर्ड में किसी बाहरी उपकरण का इंटरनल कनेक्शन कैसे होगा?

इलेक्ट्रिक बोर्ड में 2 पिन सॉकेट और 5 पिन सॉकेट का इस्तेमाल बाहरी उपकरण के कनेक्शन के लिए ही किया जाता है। लेकिन यदि आप बाहरी उपकरण का भी बोर्ड में ही फिक्स कनेक्शन करना चाहते हैं तो उसका कनेक्शन भी ठीक उसी प्रकार से करें जिस प्रकार से 5 पिन सॉकेट का कनेक्शन किया गया है।

अर्थात अपने बाहरी उपकरण के एक तार का कनेक्शन ठंडी से करें और दुसरे तार का कनेक्शन स्विच के आउटपुट से करें। यदि आपके उस बाहरी उपकरण में भू तार वाला तार भी हो तो उसे भी भू तार वाले तार के साथ जोड़ दें।

सावधानी:- बिजली बोर्ड की वायरिंग करने के दौरान बोर्ड में सप्लाई दिया हुआ नहीं होना चाहिए। Electric board की पूरी वायरिंग कर लेने के बाद ही उसमें बिजली का तार जोड़ा जायेगा।


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इमरजेंसी लाइट का चार्जर सर्किट कैसे बनाये?

इमरजेंसी लाइट एक ऐसा उपकरण है जो आजकल हरेक घरों में देखा जा सकता है। आज के समय में लगभग सभी लोग रात में अपने घर को उजाला करने के लिए इमरजेंसी लाइट का इस्तेमाल करते होंगे। आप भी अपने घर में इसका इस्तेमाल जरूर करते होंगे।

यदि आप भी इमरजेंसी लाइट का उपयोग करते हैं तो कभी-न-कभी वो ख़राब जरूर हुआ होगा। खराब इमरजेंसी लाइट को आपने किसी इलेक्ट्रिकल मैकेनिक से रिपेयरिंग भी जरूर करवाया होगा। कोई भी मैकेनिक इसे ठीक करने के लिए आपसे 50 रुपया मेहनताना और ख़राब सामान का पैसा अलग से भी वसूल लेते होंगे।

लेकिन यदि आप इलेक्ट्रिसिटी में इंटरेस्टेड हैं और इलेक्ट्रिकल रिपेयरिंग का भी थोडा-बहुत काम कर लेते हैं तो क्या आप इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट बनाने का तरीका जानते हैं? क्या आप जानते हैं इमरजेंसी लाइट का चार्जर कैसे बनाते हैं? क्या आप जानते हैं इमरजेंसी लाइट का चार्जर कैसे बनाया जाता है?

यदि आप इमरजेंसी लाइट का चार्जर बनाने की विधि नहीं जानते हैं और जानना चाहते हैं कि इमरजेंसी लाइट का चार्जर कैसे बनाये तो इस पोस्ट को जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम इमरजेंसी लाइट का चार्जिंग सर्किट बनाने की पूरी जानकारी हिंदी में देने जा रहे हैं और साथ ही इमरजेंसी लाइट चार्जर सर्किट डायग्राम भी पेश करने जा रहे हैं।

Emergency light battery charging circuit

सिंपल इमरजेंसी लाइट सर्किट कंपोनेंट्स के लिस्ट

एक सिंपल इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में इस्तेमाल होने वाले सभी कंपोनेंट्स के लिस्ट नीचे बताये दिए जा रहे हैं। यदि आप खुद से सिंपल इमरजेंसी लाइट किट सर्किट बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले नीचे बताये जा रहे सभी मटेरियल एक साथ जमा कर लें।

1) Charging LED; चार्जिंग एलईडी

किसी भी समय, इमरजेंसी लाइट चार्ज हो रहा है या नहीं, इस बात का पता लगाने के लिए emergency light charging circuit में एक छोटा-सा एलईडी बल्ब लगाया जाता है जो आमतौर पर लाल रंग में प्रकाश करता है। इस एलईडी बल्ब का कनेक्शन आप नीचे पेश किए जा रहे emergency light charger circuit diagram में समझ सकते हैं।

2) PF capacitor; इमरजेंसी लाइट का पीएफ केपेसिटर

एक सिंपल इमरजेंसी लाइट के चार्जिंग सर्किट में पीएफ केपेसिटर का सबसे अहम रोल होता है। सबसे पहले इलेक्ट्रिक ऊर्जा को पीएफ के अन्दर स्टोर किया जाता है और फिर इसके साथ ही पीएफ से ही बैटरी चार्जिंग के लिए जरूरी ऊर्जा का इस्तेमाल स्वतः किया जाता है। बैटरी के Ah के आधार पर emergency light capacitor पीएफ का चुनाव किया जाता है।

एक सामान्य emergency light battery charging circuit में 105K या 105J पीएफ केपेसिटर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यहाँ एक बात का ध्यान रहे कि यदि इमरजेंसी लाइट में लगे हुए 4 वोल्ट बैटरी की कैपेसिटी 1Ah, 1.5Ah या 2Ah है तभी 105K का पीएफ काम करेगा।

लेकिन यदि इमरजेंसी लाइट का बैटरी 2.5Ah या इससे भी ज्यादा का है तो आपको पीएफ भी 105K से ज्यादा का लेना होगा। अर्थात 2Ah से ज्यादा कैपेसिटी के बैटरी के लिए आपको जरूरत के अनुसार 155k, 225K इत्यादि वैल्यू का पीएफ लेना पड़ेगा।


3) Resistance: इमरजेंसी लाइट सर्किट का प्रतिरोध

इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में 2 रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

I) पीएफ केपेसिटर के साथ रेजिस्टेंस का इस्तेमाल

इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में पीएफ केपेसिटर के समानांतर क्रम में एक प्रतिरोध लगाया जाता है। इस प्रतिरोध की वैल्यू भी ठीक पीएफ केपेसिटर के जितना ही होता है। उदाहरण के लिए, इमरजेंसी लाइट चार्जिंग बोर्ड में यदि 105K या 105J वैल्यू का पीएफ केपेसिटर लगा है तो इसी केपेसिटर के समानांतर क्रम में 105K वैल्यू का एक रेजिस्टेंस लगाया जायेगा।

II) चार्जिंग एलईडी के साथ रेजिस्टेंस का इस्तेमाल

किसी भी समय में इमरजेंसी लाइट के चार्जिंग सर्किट के किसी भी पॉइंट पर 4 वोल्ट से लेकर 220 वोल्ट तक करंट मौजूद रहता है। कहने का तात्पर्य ये है कि पूरे सर्किट में कहीं भी 4 वोल्ट से कम सप्लाई मौजूद नहीं होता है जबकि, चार्जिंग एलईडी को सिर्फ 2.5 वोल्ट से लेकर 3 वोल्ट तक सप्लाई की ही जरूरत होती है।

इसलिए चार्जिंग एलईडी तक जरूरत के जितना ही सप्लाई पहुँचाने के लिए एक रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है। इस रेजिस्टेंस को एलईडी बल्ब के परिपथ में सीरीज क्रम में लगाया जाता है। एक सामान्य इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में 200Ω से लेकर 1000Ω अर्थात 1 किलो ओह्म्स तक के रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

4) Diode: इमरजेंसी लाइट का डायोड

पीएफ केपेसिटर का काम 220V AC को बैटरी के जरूरत के अनुसार ऊर्जा प्रदान करना है। लेकिन इसका आउटपुट भी एसी में ही होता है जबकि बैटरी को चार्ज करने के लिए डीसी सप्लाई की जरूरत होती है।

इसलिए पीएफ के आउटपुट एसी को डीसी में बदलने के लिए full wave bridge rectifier युक्ति का इस्तेमाल किया जाता है जिसके लिए 4 पीस डायोड का प्रयोग होता है। सामान्यतः किसी भी इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में 4 पीस IN 4007 डायोड का इस्तेमाल किया जाता है।

5) Filter Capacitor for bridge rectifier: फुल वेव ब्रिज रेक्टिफायर में फ़िल्टर केपेसिटर का इस्तेमाल

आमतौर पर किसी भी emergency light battery charging circuit में रेक्टिफायर के आउटपुट डीसी में बैटरी को डायरेक्ट चार्ज में लगा दिया जाता है और उससे बैटरी भी सही से चार्ज होता है। इसलिए यदि आप चाहें तो अपने सर्किट को बिना फ़िल्टर केपेसिटर के भी बना सकते हैं लेकिन इससे आपके बैटरी खराब होने की संभावना बनी रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि डायोड के आउटपुट डीसी में भी एसी करंट का कुछ अंश मौजूद रहता है।

इसलिए इस शंका से निबटने के लिए डायोड के आउटपुट के समानांतर क्रम में एक फ़िल्टर केपेसिटर लगाया जा सकता है। अर्थात डायोड के आउटपुट डीसी के (+) में केपेसिटर का (+) और, (-) में केपेसिटर का (-) लगाया जायेगा। आमतौर पर इस केपेसिटर की वैल्यू 470μf में 50V होती है। लेकिन आप लगभग इतने मान के ही दुसरे वैल्यू के केपेसिटर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, या फिर चाहें तो बिना फ़िल्टर केपेसिटर के भी चार्जिंग सर्किट बना सकते हैं।


इमरजेंसी लाइट के चार्जर का सर्किट डायग्राम

ऊपर आपने जान लिया है कि इमरजेंसी लाइट बैटरी चार्जिंग सर्किट बनाने के लिए किस-किस कंपोनेंट्स की जरूरत पड़ेगी। तो चलिए अब इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट डायग्राम देखते हैं।

Emergency light charging circuit

ऊपर का डायग्राम आपको तभी समझ आएगा जब आप इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स की थोड़ी-बहुत बेसिक बातों को जानते होंगे। यदि आप ऊपर के डायग्राम को नहीं समझ पाए हैं तो चलिए अब emergency light charger circuit diagram के सिम्पल फोटो के माध्यम से इन सभी कंपोनेंट्स के आपसी कनेक्शन को समझते हैं। इस सर्किट में ट्रांसफार्मर की जरूरत नहीं पड़ती है अर्थात ये सर्किट emergency light circuit diagram without transformer सर्किट कहलाता है।

Emergency light circuit diagram without transformer

ऊपर के चार्जिंग डायग्राम में आप निम्नलिखित बातों को देख सकते हैं।

  1. सबसे पहले बैटरी कैपेसिटी के अनुसार एक पीएफ केपेसिटर का चयन किया गया है।
  2. जितने K का pf लिया गया है उतने ही K (किलो ओह्म्स) का एक रेजिस्टेंस ले लिया गया है।
  3. पीएफ और रेजिस्टेंस को आपस में समानांतर क्रम (पैरेलल क्रम) में जोड़ दिया गया है।
  4. पीएफ के एक पिन पर 220 वोल्ट एसी का सप्लाई दे दिया गया है।
  5. पीएफ के दूसरे पिन पर बैटरी के लिए जरूरी चार्ज मिल रहा है।
  6. दूसरी तरफ, 4 पीस IN4007 डायोड की सहायता से चित्र में दर्शाए अनुसार एक फुल वेव ब्रिज रेक्टिफायर बना लिया गया है।
  7. इस रेक्टिफायर में डायोड का आपस में कनेक्शन करने पर इस तरह से 4 पॉइंट • बन रहे हैं। (- +), (- -), (+ -) और (+ +).
  8. (+ -) और (- +) वाले दोनों पॉइंट पर सप्लाई दे दिया गया है अर्थात, एक पॉइंट पर पीएफ के बचे हुए एक पिन का कनेक्शन कर दिया गया है और दुसरे पॉइंट पर बचे हुए एसी सप्लाई वाला कनेक्शन कर दिया गया है।
  9. फिर इसके बाद रेक्टिफायर को सप्लाई मिलने लगता है और वो (+ +) और (- -) वाले पॉइंट पर आउटपुट देने लगता है।
  10. यदि आप चाहें तो इसी आउटपुट पॉइंट पर 470μf में 50 वोल्ट या 100 वोल्ट का फ़िल्टर केपेसिटर भी जोड़ सकते हैं। लेकिन साथ ही इसी पॉइंट पर बैटरी का कनेक्शन भी किया जायेगा।
  11. नोट:- एक बात का ध्यान रहे कि यहाँ पर बैटरी का कनेक्शन डायोड के (+) और (-) के अनुसार उल्टा होगा अर्थात रेक्टिफायर के (- -) वाले पॉइंट पर बैटरी और केपेसिटर दोनों का (+) वाला पिन लगेगा और (+ +) वाले पॉइंट पर बैटरी और केपेसिटर दोनों का (-) वाला पिन लगेगा।
  12. अब बचा सिर्फ चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन करना तो, इमरजेंसी लाइट चार्जिंग किट सर्किट में चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन करने में कुछ कंफ्यूजन है, इसलिए चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।


इमरजेंसी लाइट सर्किट का चार्जिंग एलईडी हमेशा जलता क्यों रहता है?

बहुत बार लोग जब खुद से कोई चार्जिंग सर्किट बनाते हैं या किसी ख़राब चार्जर की रिपेयरिंग करते हैं तो वो रिपेयरिंग करने के दौरान एक गलती कर देते हैं। दरअसल वो चार्जिंग एलईडी के सीरीज में रेजिस्टेंस तो लगा देते हैं लेकिन रेजिस्टेंस सहित उस चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन उल्टा कर देते हैं।

दरअसल बहुत सारे कम जानकार मैकेनिक चार्जिंग एलईडी को सीधे चार्जर के आउटपुट पर अर्थात (+ +) और (- -) वाले पॉइंट पर जोड़ देते हैं। अब चूँकि इसी पॉइंट पर बैटरी का कनेक्शन किया जाता है इसलिए जब चार्जर में सप्लाई नहीं दिया रहता है तब भी उस पॉइंट पर बैटरी का सप्लाई मौजूद रहता है जिस वजह से बिजली कट जाने के बाद भी चार्जर का चार्जिंग एलईडी जलता रहता है।

तो अब सवाल ये उठता है कि आखिर चार्जिंग एलईडी की वायरिंग किस प्रकार से करें कि वो सिर्फ चार्ज होते समय ही जले, जब चार्जिंग ऑफ हो तो चार्जिंग एलईडी न जले? तो नीचे बताये जा रहे 5 तरीकों में से आप किसी भी तरीके से चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि सभी स्थितियों में ही चार्जिंग एलईडी के सीरीज क्रम में 1KΩ का रेजिस्टेंस लगा रहना जरूरी है।

  1. ब्रिज रेक्टिफायर के (+ -) और (- +) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। इस स्थिति में एलईडी को उल्टा-सीधा किसी भी तरह से लगाया जा सकता है।
  2. ब्रिज रेक्टिफायर के (+ +) और (+ -) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी की वायरिंग कर सकते हैं। इस स्थिति में (+ +) पर एलईडी का नेगेटिव सिरा अर्थात (-) लगेगा।
  3. रेक्टिफायर के (+ +) और (- +) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। इस स्थिति में भी (+ +) पर एलईडी का (-) ही जायेगा।
  4. रेक्टिफायर के (- -) और (- +) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। इस कंडीशन में (- -) वाले पॉइंट पर एलईडी का (+) लगेगा।
  5. रेक्टिफायर के (- -) और (+ -) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। इस स्थिति में भी (- -) वाले पॉइंट पर एलईडी का (+) सिरा ही लगेगा।

ऊपर बताये गए 5 तरीकों से स्पष्ट है कि ब्रिज रेक्टिफायर के माध्यम से आउटपुट वाले चार्जर में चार्जर एलईडी का कनेक्शन या तो इनपुट वाले दोनों पॉइंट पर उल्टा-सीधा किसी भी प्रकार से किया जा सकता है। उल्टा-सीधा का मतलब ये है कि यहाँ पर (+) और (-) की कोई दिक्कत नहीं है।

या फिर, एलईडी के एक पिन का कनेक्शन ब्रिज रेक्टिफायर के इनपुट वाले किसी भी पॉइंट पर और दुसरे पिन का कनेक्शन रेक्टिफायर के आउटपुट वाले किसी भी पॉइंट पर किया जा सकता है।

लेकिन यहाँ पर एक बात का ध्यान रहे कि जिस आउटपुट पॉइंट पर आपने चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन किया है यदि उस आउटपुट पॉइंट पर बैटरी का (+) लगा है तो वहां एलईडी का भी (+) वाला पिन ही आएगा। लेकिन यदि चार्जिंग एलईडी के कनेक्शन पॉइंट पर बैटरी का (-) लगा होगा तो वहां पर एलईडी का भी (-) वाला पिन ही लगेगा।

नोट:- 1) ब्रिज रेक्टिफायर के (- -) वाले पॉइंट पर हमेशा बैटरी और चार्जिंग एलईडी दोनों का (+) लगेगा; और साथ ही (+ +) पर हमेशा ही बैटरी और चार्जिंग एलईडी दोनों का (-) ही लगेगा। लेकिन चार्जिंग एलईडी के किसी एक पिन का ही कनेक्शन आउटपुट वाले पॉइंट से किया जायेगा।

2) (-) को कैथोड (Cathode) और; (+) को एनोड (Anode) कहा जाता है।


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इलेक्ट्रिक बोर्ड के सभी मटेरियल के लिस्ट हिंदी में

बिजली की पहुँच अब सभी घरों तक हो गयी है और आपने भी बिजली का कनेक्शन जरूर लिया होगा। यदि आपने बिजली का कनेक्शन लिया होगा तो आपने अपने घर की वायरिंग जरूर करवाया होगा। घर की वायरिंग करवाने के लिए आपने वायरिंग मटेरियल पर खर्च करने के साथ ही बिजली मिस्त्री पर भी जमकर खर्च किया होगा।

जब भी आपको वायरिंग करना होता है या फिर वायरिंग फोल्ट को ठीक करना होता है तो आप किसी बिजली मास्टर को बुलाते हैं और उन्हें इसके लिए ज्यादा पैसे भी देते हैं। लेकिन यदि इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में आप रुचि रखते होंगे और यदि बिजली से फालतू का डर आपको नहीं लगता होगा तो आप खुद से अपने घर की वायरिंग कर सकते हैं या वायरिंग के फोल्ट को ठीक कर सकते हैं।

electric board wiring diagram

खुद से एक सिंपल हाउस वायरिंग करना बेहद ही आसान है और ये काम हरेक वो इंसान कर सकता है जिसे बिजली का काम करने में रुचि हो। यदि आपको भी बिजली का काम करने में रुचि है और आपको बिजली से फालतू का डर नहीं लगता है तो आप भी हमारे पोस्ट को पढ़कर अपने घर की वायरिंग या वायरिंग की मरम्मत कर सकते हैं।

लेकिन यदि आपको पता नहीं है कि हाउस वायरिंग करने के दौरान इलेक्ट्रिक बोर्ड में कौन-कौन-सा सामान लगता है तो आज का हमारा ये पोस्ट जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम इलेक्ट्रिक बोर्ड में इस्तेमाल होने वाले सभी wiring material के लिस्ट हिंदी में देने जा रहे हैं।

इलेक्ट्रिक बोर्ड में कौन-कौन-सा सामान लगता है?

यदि आप अपने बोर्ड की वायरिंग करना चाहते हैं तो सबसे पहले उन सभी मटेरियल की लिस्ट बना लें जिसकी आपको वायरिंग में जरूरत है। नीचे दिए जा रहे लिस्ट में से आप अपने जरूरत के मटेरियल की लिस्ट बना सकते हैं।

1) बोर्ड शीट क्या है?

इलेक्ट्रिक बोर्ड में सभी मटेरियल को जिस शीट पर फिट किया जाता है उसे बोर्ड शीट कहते हैं। बोर्ड शीट साधारणतः चौकोर और चिकना होता है। इलेक्ट्रिक बोर्ड शीट लकड़ी का भी होता है और मजबूत प्लाई का भी होता है। इसमें से प्लाई वाला शीट मजबूत और आकर्षक होता है।

सभी मटेरियल को लगाने के लिए बोर्ड शीट में उचित नाप का काट-छांट करना पड़ता है। यदि आपके पास बोर्ड के काट-छांट करने की व्यवस्था हो तो ठीक है, अन्यथा आप मार्केट से अपने जरूरत के अनुसार कटिंग की हुई बोर्ड शीट भी खरीद सकते हैं।


2) Indicator क्या है; इलेक्ट्रिक बोर्ड में इंडिकेटर का काम क्या है?

आपके बिजली बोर्ड तक बिजली का सप्लाई पहुँच रहा है या नहीं, इस बात का पता लगाने के लिए बोर्ड में इंडिकेटर का इस्तेमाल किया जाता है। इंडिकेटर का मतलब ही होता है सूचक, अर्थात बिजली के उपस्थिति या अनुपस्थिति के सूचक को इंडिकेटर कहते हैं। बिजली की मौजूदगी का पता लगाने के सिवाय और इसका कोई काम नहीं है। इस इंडिकेटर को electric board indicator कहा जाता है।

3) Fuse क्या है; इलेक्ट्रिक बोर्ड में फ्यूज का काम क्या है?

किसी भी घर में एक निश्चित संख्या में ही इलेक्ट्रिक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है जिस वजह से बिजली की खपत भी हमेशा लगभग एक समान ही होता है। इसी वजह से आपके घर की वायरिंग में एक समय में दौड़ने वाला करंट (एम्पेयर) भी लगभग फिक्स ही होता है। आप अपने इलेक्ट्रिक बोर्ड पर एक समय में अधिकतम कितना लोड देंगे उसके अनुसार जरूरी एम्पेयर का फ्यूज आपको आपके इलेक्ट्रिक बोर्ड में लगाना होता है।

इलेक्ट्रिक बोर्ड में फ्यूज लगाने का फायदा ये है कि यदि कभी भी आपके बोर्ड या उससे जुड़े हुए उपकरण में किसी भी प्रकार की कोई शोर्टिंग होगी तो आपका फ्यूज जल जायेगा जिससे आपके महंगे उपकरण जलने से बच जायेंगे। साथ ही यदि दुर्भाग्य से कभी उस बोर्ड या उससे जुड़े हुए उपकरण से किसी को करंट लग जाए तो उस स्थिति में भी फ्यूज जल जायेगा और उस इंसान की जान बच जायेगी।

ऐसा इसलिए क्योंकि किसी भी उपकरण में शोर्टिंग की स्थिति में या फिर करंट लगने की स्थिति में एकाएक बिजली की खपत बढ़ जाती है जिस वजह से फ्यूज से होकर करंट भी ज्यादा बहने लगता है जिसे फ्यूज बर्दाश्त नहीं कर पाता और जल जाता है।

इस फ्यूज का एक और फायदा ये है कि यदि बाद में आपके बोर्ड में कभी कोई फोल्ट आ जाये तो फ्यूज को निकालकर पूरे बोर्ड का सप्लाई बंद किया जा सकता है। फ्यूज निकाल देने के बाद बिना किसी डर के बोर्ड की मरम्मत की जा सकती है। बिजली बोर्ड में इस्तेमाल होने वाले फ्यूज को electric board fuse कहा जाता है।


4) Switch क्या है; इलेक्ट्रिक बोर्ड में स्विच का काम क्या है?

जब किसी उपकरण का इस्तेमाल नहीं करना होता है तो उसके प्लग को बोर्ड से बाहर किया जा सकता है। लेकिन बल्ब और पंखे का कनेक्शन तो बोर्ड के अन्दर ही कर दिया जाता है इसलिए इस प्रकार से इसे ऑफ नहीं किया जा सकता। इसे ऑफ करने के लिए बोर्ड में एक स्विच लगाना पड़ता है।

आप अपने बोर्ड में कितने उपकरण का इस्तेमाल करेंगे, इस आधार पर आप उतना अलग-अलग स्विच बोर्ड में लगा सकते हैं। इलेक्ट्रिक बोर्ड में इस्तेमाल होने वाले स्विच को electric board switch कहा जाता है।

5) 2 pin socket क्या है; इलेक्ट्रिक बोर्ड में 2 पिन सॉकेट का काम क्या है?

इलेक्ट्रिक बोर्ड में 2 पिन सॉकेट का इस्तेमाल एक्सटर्नल कनेक्शन करने के लिए किया जाता है। बल्ब और सीलिंग फेन का कनेक्शन तो बोर्ड के अन्दर ही कर दिया जाता है लेकिन बहुत सारे उपकरण ऐसे होते हैं जिनका बोर्ड में फिक्स कनेक्शन नहीं किया जा सकता।

ऐसे बाहरी उपकरण में एक कनेक्शन तार लगा होता है जिसमें एक प्लग लगा होता है। इसी प्लग को लगाने के लिए इलेक्ट्रिक बोर्ड में 2 पिन सॉकेट लगाया जाता है। इसी 2 pin socket में किसी भी उपकरण के प्लग को लगाकर उसका इस्तेमाल किया जाता है। बोर्ड में 2 पिन सॉकेट के लिए भी एक स्विच लगाया जाता है ताकि बोर्ड से बिना प्लग को निकाले ही किसी उपकरण को ऑन या ऑफ़ किया जा सके।


6) 5 pin socket क्या है; इलेक्ट्रिक बोर्ड में 5 पिन सॉकेट का काम क्या है?

5 पिन सॉकेट का काम भी ठीक 2 पिन सॉकेट के जैसा ही है। 5 पिन सॉकेट का इस्तेमाल भी एक्सटर्नल उपकरण के कनेक्शन के लिए ही किया जाता है और इसमें भी बाहरी उपकरण के प्लग को ही लगाया जाता है। बोर्ड में 5 पिन सॉकेट के लिए भी एक स्विच लगाया जाता है और आप जितना चाहें उतना सॉकेट बोर्ड में लगा सकते हैं।

5 पिन सॉकेट में प्लग लगाने के लिए 2-2 खाने बने होते हैं और किसी में भी प्लग को लगाया जा सकता है। इसके बाद 5 pin socket का जो पांचवा होल होता है वो भू तार कनेक्शन के लिए होता है। आपने आयरन के प्लग में 3 पिन लगा देखा होगा जिसमें 2 पिन तो सप्लाई के लिए होता है लेकिन तीसरा पिन भू तार के लिए ही होता है।

आयरन के प्लग में 3 पिन होने की वजह से उसे 2 पिन वाले सॉकेट में नहीं लगाया जा सकता। जिस किसी भी उपकरण के प्लग में 3 पिन होता है उसे सिर्फ 5 पिन सॉकेट में ही लगाया जा सकता है। ये तीसरा पिन भू-तार के कनेक्शन के लिए होता है, यदि आप भू-तार के बारे में नहीं जानते हैं तो नीचे वाला पोस्ट पढ़ सकते हैं।


7) Bulb holder क्या है; इलेक्ट्रिक बोर्ड में बल्ब होल्डर का काम क्या है?

इलेक्ट्रिक बोर्ड में बल्ब का कनेक्शन करने के लिए बोर्ड बल्ब होल्डर की जरूरत पड़ती है। पहले तो बल्ब होल्डर को बोर्ड में फिक्स कर दिया जाता है। फिर इसके बाद बाकी सभी मटेरियल लगाने के बाद बोर्ड को कस दिया जाता है। इसके बाद बाहर से ही इस bulb holder में बल्ब को लगा दिया जाता है।

8) इलेक्ट्रिक बोर्ड में फैन रेगुलेटर का काम क्या है?

सीलिंग पंखा के स्पीड को नियंत्रित करने के लिए फेन रेगुलेटर का इस्तेमाल किया जाता है। सीलिंग फेन को छत से लटकाया जाता है और बोर्ड में उसका इंटरनल कनेक्शन कर दिया जाता है।

चूंकि सीलिंग पंखा को छत से लटकाया जाता है इसलिए यदि पंखे में ही रेगुलेटर को लगा दिया जाये तो उसका इस्तेमाल करना कठिन हो जायेगा। इसलिए सीलिंग फेन के रेगुलेटर को इलेक्ट्रिक बोर्ड में लगाया जाता है ताकि आसानी से उसका इस्तेमाल किया जा सके।


9) इलेक्ट्रिकल बोर्ड में तार का काम क्या है?

बोर्ड में इस्तेमाल किये जाने वाले सभी मटेरियल का आपस में इलेक्ट्रिकल कनेक्शन करने के लिए कुछ मीटर तार का इस्तेमाल भी किया जाता है। एक बात का ध्यान रहे कि इलेक्ट्रिक बोर्ड की वायरिंग में हमेशा कॉपर के तार का ही इस्तेमाल करें।

चूँकि तार ही बिजली करंट के चलने का माध्यम होता है इसलिए इलेक्ट्रिक बोर्ड में हमेशा उचित तार का इस्तेमाल करें। यदि आप पतले तार से बोर्ड की वायरिंग करेंगे तो कुछ दिन बाद ही वो जल जाएगा। इसलिए पूरी कोशिश करें कि बोर्ड में हमेशा मजबूत और सिंगल वायर का ही इस्तेमाल किया जाये।

10) बोर्ड का लकड़ी क्या है?

जिस प्लाई पर सभी मटेरियल को कसा जाता है उसे बोर्ड शीट कहते हैं लेकिन इस बोर्ड शीट को भी एक लकड़ी के बोर्ड पर कस दिया जाता है। सबसे पहले तो इस लकड़ी के बोर्ड को दीवार में कांटी की सहायता से चिपका दिया जाता है और फिर इसके बाद बोर्ड शीट को स्क्रू की मदद से लकड़ी के इस बोर्ड पर कस दिया जाता है।

11) इलेक्ट्रिक बोर्ड में कांटी का काम क्या है?

बोर्ड के लकड़ी को दीवार से चिपकाने के लिए कांटी का ही प्रयोग किया जाता है। सबसे पहले तो बोर्ड के लकड़ी को दीवार में उचित जगह पर पकड़ कर बैठा दिया जाता है फिर उसके बाद हथौड़े से उस पर कांटी को ठोक दिया जाता है। लकड़ी को ठोकने के लिए कम-से-कम 2 इंच के 4 पीस कांटी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

12) दीवार गुटका क्या है?

यदि आपके घर का दीवार कमजोर है और उस पर कांटी सही से फिट नहीं होता है और कुछ दिन बाद ही हिलने लगता है तो ऐसे दीवार पर कांटी ठोकने के लिए आपको प्लास्टिक गुटका या लकड़ी के गुटका का इस्तेमाल करना होगा।

सबसे पहले तो दीवार पर आपको कहाँ-कहाँ कांटी ठोकना है उसका निशान बना लें। फिर इसके बाद गुटका के चौडाई जितना छेद अपने दीवार में कर दें। फिर इसके बाद उसमें गुटके को ठोक दें और फिर सबसे अंत में बोर्ड को ठोक दें। प्लास्टिक वाले गुटके को plastic wall plug और लकड़ी वाले गुटके को wood wall plug भी कहा जाता है।

13) बोर्ड स्क्रू

जब बोर्ड शीट में सभी कंपोनेंट्स को फिट कर दिया जाता है और दीवार में लकड़ी भी ठोक दिया जाता है तो सबसे अंत में बोर्ड शीट को लकड़ी पर सेट करना होता है। बोर्ड शीट को लकड़ी पर फिट करने के लिए ही स्क्रू का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए आधा इंच के कम-से-कम 4 स्क्रू की जरूरत पड़ती है।


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