मल्टीमीटर से ट्रांसफार्मर की चेकिंग और टेस्टिंग कैसे करे

इलेक्ट्रिक रिपेयरिंग का काम करने वाले सभी इलेक्ट्रिकल मैकेनिक को ट्रांसफार्मर के बारे में जरूर पता होगा। सभी जानते होंगे कि ट्रांसफार्मर क्या है और ट्रांसफार्मर का कार्य सिद्धांत क्या है। यदि आपको ट्रांसफार्मर की जानकारी नहीं है तो आप ट्रांसफार्मर इन हिंदी से सम्बंधित हमारे सारे पोस्ट हिंदी में पढ़ सकते हैं।

यदि आप रिपेयरिंग का काम करते हैं तो बहुत सारे उपकरणों में आपको ट्रांसफार्मर टेस्टिंग करने की जरूरत पड़ती होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एनालॉग मल्टीमीटर या डिजिटल मल्टीमीटर से ट्रांसफार्मर का मल्टीमीटर टेस्ट कैसे किया जाता है? क्या आप जानते हैं कि खराब ट्रांसफार्मर को कैसे चेक किया जाता है?
transformer checking with multimeter
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यदि आपको transformer टेस्टिंग की जानकारी नहीं है तो हमारा आज का ये पोस्ट जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम ट्रांसफार्मर मल्टीमीटर टेस्ट करने की पूरी जानकारी हिंदी में देने जा रहे हैं।

ट्रांसफार्मर की चेकिंग कितने प्रकार से की जाती है?

ट्रांसफार्मर की चेकिंग निम्नलिखित 2 प्रकार से की जा सकती है।

1) Transformer voltage testing: वोल्ट मापकर ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग

हमने ट्रांसफार्मर क्या है पोस्ट में बताया था कि transformer का काम सिर्फ-और-सिर्फ एसी वोल्टेज को कम या ज्यादा करना होता है। इसका मतलब ये हुआ कि यदि ट्रांसफार्मर सही है तो उसके प्राइमरी क्वाइल में सप्लाई देने के बाद सेकेंडरी कॉयल से आउटपुट भी जरूर मिलना चाहिए। इसलिए यदि ट्रांसफार्मर में इनपुट सप्लाई देने के बाद उसके आउटपुट से सप्लाई न मिले तो वो transformer ख़राब माना जा सकता है। मल्टीमीटर या एसी वोल्टमीटर से ट्रांसफार्मर की वोल्ट टेस्टिंग की जा सकती है।

2) Transformer coil testing: रेजिस्टेंस विधि से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग

ट्रांसफार्मर वाले पोस्ट में हमने बताया था कि किसी भी ट्रांसफार्मर में सिर्फ क्वाइल ही लगा होता है। और साथ ही किसी भी कॉयल को रेजिस्टेंस मापकर चेक किया जा सकता है। इसलिए जाहिर-सी बात है कि transformer के क्वाइल की बारी-बारी से टेस्टिंग करके पूरे ट्रांसफार्मर की चेकिंग की जा सकती है। डीसी टेस्टर, रेजिस्टेंस मीटर और किसी भी तरह के मल्टीमीटर के द्वारा रेजिस्टेंस विधि से ट्रांसफार्मर की चेकिंग की जा सकती है। इस विधि में transformer में सप्लाई नहीं दिया जाता है।


ट्रांसफार्मर की चेकिंग करने के लिए किस उपकरण की जरूरत पड़ती है?

यदि आप ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग करना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास निम्नलिखित में से कोई एक उपकरण होना जरुरी होगा।

1) Multimeter: मल्टीमीटर से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग

रिपेयरिंग के कामों में लगभग सभी इलेक्ट्रिकल सामानों की जांच मल्टीमीटर से ही की जाती है। इसलिए लगभग सभी इलेक्ट्रिकल मैकेनिक ट्रांसफार्मर टेस्टिंग करने के लिए मल्टीमीटर का ही इस्तेमाल करते हैं। मल्टीमीटर से ट्रांसफार्मर को चेक करने को transformer multimeter test कहा जाता है। ट्रांसफार्मर को डिजिटल मल्टीमीटर और एनालॉग मल्टीमीटर दोनों ही प्रकार के मीटर से चेक किया जा सकता है। मल्टीमीटर से वोल्ट और रेजिस्टेंस दोनों ही विधि से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग की जा सकती है।


2) AC Voltmeter: एसी वोल्टमीटर से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग

एसी वोल्टमीटर से वोल्ट विधि से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग की जा सकती है। यदि आपके पास मल्टीमीटर नहीं है तो आप वोल्टमीटर से transformer की टेस्टिंग कर सकते हैं। दोनों का परिणाम एक समान होगा।


3) Resistance Meter: रेजिस्टेंस मीटर से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग

रेजिस्टेंस मीटर से रेजिस्टेंस विधि से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग की जा सकती है। यदि आपके पास मल्टीमीटर न हो तो आप रेजिस्टेंस मीटर से transformer की टेस्टिंग कर सकते हैं। दोनों का परिणाम एक समान होगा।


4) DC tester: डीसी टेस्टर से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग

डीसी टेस्टर एक प्रकार का इलेक्ट्रिक टेस्टर होता है जिसकी सहायता से बिना बिजली प्रवाहित किसी भी सर्किट के किसी ख़ास पॉइंट के बीच के रेजिस्टेंस का अनुमान लगाया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो, डीसी टेस्टर का इस्तेमाल अनुमानित कंटिन्यूटी चेक करने के लिए किया जाता है। डीसी टेस्टर में एक छोटा-सा डीसी एलईडी बल्ब लगा होता है। रेजिस्टेंस चेक करते समय डीसी टेस्टर का एलईडी बल्ब जितना कम प्रकाश में जलेगा रेजिस्टेंस का मान उतना ज्यादा होगा।


चूंकि किसी भी ट्रांसफार्मर में सिर्फ क्वाइल लगा होता है और कॉयल की जांच डीसी टेस्टर के द्वारा आसानी से की जा सकती है। इसलिए किसी भी transformer की टेस्टिंग डीसी टेस्टर से आसानी से की जा सकती है। लेकिन एक बात का ध्यान रहे कि इस टेस्टर से सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है, ट्रांसफार्मर के ख़राब या सही होने की बात पक्के तौर पर कहीं नहीं जा सकती है। कहने का मतलब ये हुआ कि डीसी टेस्टर से transformer test report सही से नहीं मिलता है।

ट्रांसफार्मर के सेकेंडरी क्वाइल और प्राइमरी क्वाइल की पहचान कैसे करें?

How to check transformer primary and secondary: किसी भी ट्रांसफार्मर में 2 तरह का कॉयल होता है- प्राइमरी क्वाइल और सेकेंडरी क्वाइल। हालांकि अच्छी कंपनी के transformer के दोनों coil से अलग-अलग रंग का तार बाहर निकाला जाता है जिससे दोनों की पहचान आसानी से की जा सकती है। लेकिन बहुत सारे ट्रांसफार्मर में इस प्रकार से कॉयल की पहचान नहीं की जा सकती है।

यदि आपको पता नहीं है कि transformer का कौन-सा coil प्राइमरी है और कौन-सा सेकेंडरी, तो ऐसे में यदि आप इसमें पॉवर सप्लाई दे देंगे तो हो सकता है कि आपने सेकेंडरी कॉयल पर ही सप्लाई दे दिया हो। तो ऐसे में ट्रांसफार्मर जलकर खराब भी हो सकता है। इसलिए नीचे हम कुछ ट्रिक बता रहे हैं जिससे आप आसानी से किसी भी ट्रांसफार्मर के प्राइमरी और सेकेंडरी क्वाइल की पहचान कर सकेंगे।

  1. प्राइमरी क्वाइल की अपेक्षा सेकेंडरी कॉयल कम गेज का होता है। इसका मतलब ये हुआ कि प्राइमरी coil, सेकेंडरी कॉयल की अपेक्षा पतला होता है।
  2. प्राइमरी क्वाइल में सेकेंडरी क्वाइल की अपेक्षा ज्यादा बाइंडिंग की हुई होती है। इसका मतलब ये हुआ कि यदि मल्टीमीटर से transformer के कॉयल का रेजिस्टेंस चेक किया जाए तो सेकेंडरी क्वाइल की तुलना में प्राइमरी कॉयल का प्रतिरोध ज्यादा होगा।

ऊपर बताई गई बातों से स्पष्ट होता है कि...

  1. ट्रांसफार्मर का जो क्वाइल पतला होगा वो प्राइमरी कॉयल होगा और जो क्वाइल मोटा होगा वो सेकेंडरी क्वाइल होगा।
  2. जिस क्वाइल के दोनों छोर के बीच का प्रतिरोध ज्यादा होगा वो प्राइमरी कॉयल होगा और जिस क्वाइल के दोनों छोर के बीच का प्रतिरोध कम होगा वो सेकेंडरी कॉयल होगा।

ट्रांसफार्मर किन परिस्थितियों में सही माना जाता है?

कोई भी ट्रांसफार्मर को निम्नलिखित 5 परिस्थितियों में ही सही माना जायेगा। चेकिंग करने के दौरान यदि इनमें से कोई भी टॉपिक गलत हो जाये तो ट्रांसफार्मर खराब माना जायेगा।

  1. ट्रांसफार्मर का प्राइमरी क्वाइल सही हो।
  2. ट्रांसफार्मर का सेकेंडरी क्वाइल सही हो।
  3. प्राइमरी क्वाइल और सेकेंडरी क्वाइल आपस में शोर्ट न हों।
  4. कोर और प्राइमरी क्वाइल आपस में शोर्ट न हों।
  5. कोर और सेकेंडरी क्वाइल आपस में शोर्ट न हों।


वोल्ट विधि से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग कैसे करें?

वोल्टेज विधि से ट्रांसफार्मर को चेक करने की विधि के बारे में हम पॉइंट-बाई-पॉइंट नीचे बता रहे हैं। आप एक-एक पॉइंट को गौरपूर्वक पढ़ें और पहले समझ लें इसके बाद टेस्टिंग करें। एक बात का ध्यान रहे कि वोल्ट विधि से transformer की टेस्टिंग करने के लिए पहले उसमें सप्लाई देना होगा। सप्लाई देने के बाद और चेकिंग करने के दौरान आपका शरीर ट्रांसफार्मर और उसके नंगे तार के संपर्क में नहीं आना चाहिए। साथ ही इस पूरे प्रक्रिया के दौरान transformer किसी भी सर्किट के संपर्क में नहीं होना चाहिए।

  1. सबसे पहले ट्रांसफार्मर को सभी जुड़े हुए सर्किट से अलग कर लें।
  2. इसके बाद आपको ये पता होना चाहिए कि ट्रांसफार्मर का कौन-सा coil प्राइमरी क्वाइल है और कौन सा क्वाइल सेकेंडरी कॉयल है। यदि आपको ये पता नहीं है तो सबसे पहले ऊपर बताये गए तरीके से इस बात का पता लगा लें। अब मान लेते हैं कि आपको प्राइमरी और सेकेंडरी कॉयल का पता चल गया है।
  3. इसके बाद आपको ये पता होना चाहिए कि आपका transformer कितने वोल्ट का है। मतलब ये कि वो ट्रांसफार्मर कितना वोल्ट प्रदान करता है। मान लेते हैं कि वो ट्रांसफार्मर 12 वोल्ट का है।
  4. अब उस ट्रांसफार्मर के प्राइमरी क्वाइल वाले तार में 200-220V एसी का सप्लाई दे दीजिये। यदि आप इससे कम वोल्ट का सप्लाई देंगे तो transformer का आउटपुट भी कम वोल्ट का होगा जिससे टेस्टिंग के रिजल्ट पर असर पड़ेगा।
  5. अब अपने मल्टीमीटर को 200V AC या इससे ज्यादा वोल्ट के रेंज पर लायें। ध्यान रहे कि ट्रांसफार्मर में सिर्फ एसी वोल्ट ही होता है इसलिए यहाँ पर मल्टीमीटर के प्लग में (+) और (-) नहीं होगा। आप मल्टीमीटर के प्लग को उल्टा-सीधा किसी भी तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं।

1) ट्रांसफार्मर के क्वाइल को चेक करना

सबसे पहले ऊपर बताये गए जितना काम कर लें और तब नीचे बताये गए विधि से ट्रांसफार्मर क्वाइल टेस्टिंग करें।

  1. ट्रांसफार्मर के प्राइमरी coil जिस पर आपने सप्लाई दिया है वहां पर वोल्टेज चेक करके संतुष्ट हो जायें कि ट्रांसफार्मर को सप्लाई मिल रहा है या नहीं। मान लेते हैं कि यहाँ पर सही वोल्टेज बता रहा है तो अब आगे बढें।
  2. अब सेकेंडरी क्वाइल पर वोल्ट चेक करें।
  3. चूँकि आपका transformer 12 वोल्ट का है, इसलिए यदि इस coil पर लगभग 12 वोल्ट बताए तो इसका मतलब ट्रांसफार्मर का प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों coil सही है और ट्रांसफार्मर भी सही है।
  4. यदि सेकेंडरी कॉयल पर 0 वोल्ट बताए तो ट्रांसफार्मर खराब है।
  5. यदि सेकेंडरी क्वाइल पर 12 वोल्ट से बहुत कम वोल्टेज बताये तो इसका मतलब होगा कि ट्रांसफार्मर के क्वाइल और तार के बीच कार्बन बन गया है। या फिर किसी भी वजह से transformer ओपन हो गया है।
  6. यदि सेकेंडरी कॉयल पर 12 वोल्ट से बहुत ज्यादा वोल्ट बताये तो इसका मतलब होगा कि ट्रांसफार्मर का प्राइमरी क्वाइल शोर्ट है।

2) ट्रांसफार्मर की शोर्टिंग चेक करना

ऊपर आपने अभी तक सिर्फ ट्रांसफार्मर के coil को चेक किया था। यदि ऊपर बताये गए तक सब कुछ सही है तो आपका transformer सही से काम करेगा। लेकिन अभी प्राइमरी क्वाइल और सेकेंडरी क्वाइल के बीच की शोर्टिंग और दोनों coil और कोर के बीच की शॉर्टिंग चेक करनी बाकी है। तो चलिए अब ट्रांसफार्मर शोर्टिंग टेस्ट करते हैं। ध्यान रहे कि इस चेकिंग के दौरान भी ट्रांसफार्मर में सप्लाई दिया होना जरूरी है। और साथ ही मल्टीमीटर भी अधिकतम एसी वोल्ट के रेंज पर होना चाहिए।

a) प्राइमरी कएल और सेकेंडरी कएल के बीच की शोर्टिंग की जांच करना

  1. मल्टीमीटर के किसी भी एक प्लग को प्राइमरी क्वाइल के किसी भी एक छोर पर सटाएँ और दुसरे प्लग को सेकेंडरी क्वाइल के किसी भी एक छोर पर सटाएँ।
  2. यदि मल्टीमीटर में पूरी तरह से 0 वोल्ट बताये तो दोनों coil आपस में शोर्ट नहीं होंगे।
  3. यदि मल्टीमीटर में थोडा-सा भी वोल्ट बताये तो इसका मतलब दोनों क्वाइल आपस में शोर्ट है और उससे जुड़े हुए सर्किट को नुकसान पहुँच सकता है।

b) प्राइमरी क्वाइल और ट्रांसफार्मर के बॉडी/कोर के बीच शोर्टिंग की जांच करना

  1. मल्टीमीटर के एक प्लग को ट्रांसफार्मर के प्राइमरी क्वाइल के किसी भी एक तार में सटाएँ और दुसरे प्लग को ट्रांसफार्मर के कोर/बॉडी में सटाएँ।
  2. यदि मल्टीमीटर में थोडा-सा भी वोल्ट न बताये तो इसका मतलब प्राइमरी क्वाइल और कोर आपस में शोर्ट नहीं है।
  3. यदि मल्टीमीटर में थोडा-सा भी वोल्ट बता दे तो इसका मतलब प्राइमरी क्वाइल और कोर दोनों ही आपस में शोर्ट हैं।

c) कोर और सेकेंडरी क्वाइल के बीच शोर्टिंग की जांच करना

  1. मल्टीमीटर के एक प्लग को ट्रांसफार्मर के सेकेंडरी क्वाइल के किसी भी एक तार में सटाएँ और दुसरे प्लग को कोर में सटाएँ।
  2. यदि मल्टीमीटर में थोडा सा भी वोल्ट दिखा दे तो इसका मतलब कोर और सेकेंडरी क्वाइल दोनों आपस में शोर्ट हैं।
  3. यदि मल्टीमीटर में थोडा सा भी वोल्ट न दिखाए तो इसका मतलब कोर और सेकेंडरी क्वाइल आपस में शोर्ट नहीं हैं।


रेजिस्टेंस विधि से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग कैसे करें?

How to test a transformer with an ohmmeter: ऊपर हमने ट्रांसफार्मर चेक करने का जो ट्रिक बताया था वो वोल्टेज विधि से चेक करने का ट्रिक था। अब हम आपको रेजिस्टेंस विधि से ट्रांसफार्मर को चेक करने के बारे में बताने जा रहे हैं। इस ट्रिक से टेस्टिंग करने के दौरान भी आपका transformer किसी भी सर्किट के संपर्क में नहीं होना चाहिए।

साथ ही एक और बात का ध्यान रहे कि रेजिस्टेंस ट्रिक से चेक करने के दौरान ट्रांसफार्मर में सप्लाई नहीं दिया होना चाहिए। रेजिस्टेंस विधि से चेक करने के दौरान आप ट्रांसफार्मर और उसके नंगे तार को छू भी सकते हैं। साथ ही, इस विधि से transformer को चेक करने में भी मल्टीमीटर के लाल और काला प्लग को उल्टा-सीधा किसी भी तरह से लगा सकते हैं।

  1. सबसे पहले ट्रांसफार्मर को सभी सर्किट से अलग करें।
  2. प्राइमरी और सेकेंडरी क्वाइल की पहचान कर लें।
  3. ट्रांसफार्मर में सप्लाई नहीं देना है, बिना सप्लाई दिए ही उसे चेक करना है।
  4. यदि आपके पास डिजिटल मल्टीमीटर है तो उसे बजर की रेंज पर या 2000Ω की रेंज पर रखें।
  5. यदि आपके पास एनालॉग मल्टीमीटर है तो उसे रेजिस्टेंस के सबसे छोटे रेंज यानी कि 10K रेंज पर रखें।

1) रेजिस्टेंस चेक करके ट्रांसफार्मर के क्वाइल को चेक करना

  1. सबसे पहले प्राइमरी क्वाइल के रेजिस्टेंस को चेक करें।
  2. यदि रेजिस्टेंस 0 के लगभग बताये तो प्राइमरी क्वाइल शोर्ट है।
  3. यदि रेजिस्टेंस बिलकुल भी न बताये तो प्राइमरी क्वाइल ओपन है और ख़राब है।
  4. यदि रेजिस्टेंस बहुत ज्यादा बताए तो प्राइमरी क्वाइल पर कार्बन लगा है।
  5. यदि ट्रांसफार्मर के coil के अनुसार रेजिस्टेंस बता दे तो प्राइमरी क्वाइल सही है।
  6. सेकेंडरी क्वाइल को भी प्राइमरी क्वाइल जैसे ही चेक कर लें।
  7. यहाँ ध्यान रहे कि प्राइमरी क्वाइल और सेकेंडरी coil दोनों के रेजिस्टेंस एक समान नहीं होते और दोनों में बहुत ही अंतर होता है। अर्थात प्राइमरी क्वाइल का रेजिस्टेंस सेकेंडरी क्वाइल के रेजिस्टेंस की तुलना में ज्यादा होगा।

2) रेजिस्टेंस विधि से ट्रांसफार्मर की शोर्टिंग चेक करना

ऊपर हमने जो तरीका बताया था उससे सिर्फ transformer का क्वाइल चेक होगा। यदि दोनों coil सही होगा तो ट्रांसफार्मर सही से काम करेगा लेकिन फिर भी हो सकता है कि वो ट्रांसफार्मर शोर्ट हो। तो चलिए रेजिस्टेंस विधि से transformer की शोर्टिंग चेक करने के बारे में जानते हैं।

a) प्राइमरी क्वाइल और सेकेंडरी क्वाइल के बीच शोर्टिंग की जांच करना

  1. मल्टीमीटर का कोई एक प्लग प्राइमरी क्वाइल के किसी भी एक तार पर लगायें और दूसरा प्लग सेकेंडरी क्वाइल के किसी भी एक तार के साथ लगायें।
  2. यदि कुछ भी रेजिस्टेंस बताये तो इसका मतलब दोनों coil आपस में शोर्ट है।
  3. यदि बिलकुल भी रेजिस्टेंस न बताये तो इसका मतलब क्वाइल आपस में शोर्ट नहीं है।

b) कोर और प्राइमरी क्वाइल के बीच शोर्टिंग चेक करना

  1. मल्टीमीटर का कोई एक प्लग प्राइमरी coil के किसी भी एक तार पर लगायें और दूसरा प्लग कोर के साथ लगायें।
  2. यदि कुछ भी या थोडा सा भी रेजिस्टेंस बताये तो प्राइमरी क्वाइल और कोर आपस में शोर्ट हैं।
  3. यदि थोडा सा भी रेजिस्टेंस न बताये तो कोर और प्राइमरी क्वाइल आपस में शोर्ट नहीं हैं।

c) कोर और सेकेंडरी क्वाइल के बीच शोर्टिंग चेक करना

  1. मल्टीमीटर का कोई एक प्लग सेकेंडरी क्वाइल के किसी भी एक तार पर लगायें और दूसरा प्लग कोर के साथ लगायें।
  2. यदि कुछ भी रेजिस्टेंस बताये तो सेकेंडरी क्वाइल आपस में शोर्ट हैं।
  3. यदि कुछ भी रेजिस्टेंस न बताए तो सेकेंडरी coil और कोर आपस में शोर्ट नहीं हैं।


डीसी टेस्टर से ट्रांसफार्मर टेस्टिंग कैसे करें?

डीसी टेस्टर से रेजिस्टेंस विधि से ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग की जा सकती है। इसके लिए आप नीचे के सभी पॉइंट्स को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

1) डीसी टेस्टर से ट्रांसफार्मर के क्वाइल को चेक करना

  1. डीसी टेस्टर के दोनों प्लग को प्राइमरी क्वाइल के दोनों तार पर सटायें।
  2. यदि टेस्टर पूरे प्रकाश के साथ जले तो प्राइमरी क्वाइल शोर्ट है।
  3. यदि टेस्टर बिलकुल भी न जले तो प्राइमरी क्वाइल ओपन है और खराब है।
  4. यदि टेस्टर अपने वास्तविक प्रकाश से कम प्रकाश करे तो प्राइमरी क्वाइल सही है।
  5. सेकेंडरी क्वाइल की चेकिंग भी प्राइमरी क्वाइल के जैसे ही होगी।

2) डीसी टेस्टर से ट्रांसफार्मर की शोर्टिंग चेक करना

ऊपर आपने अभी तक सिर्फ ट्रांसफार्मर के coil को चेक किया है। चलिए अब शोर्टिंग को चेक करने के बारे में जानते हैं।

a) प्राइमरी क्वाइल और सेकेंडरी क्वाइल के बीच की शोर्टिंग चेक करना

  1. डीसी टेस्टर के एक प्लग को प्राइमरी क्वाइल के किसी भी एक तार से जोड़ दें और दुसरे प्लग को सेकेंडरी क्वाइल के किसी एक तार के साथ जोड़ दें।
  2. यदि टेस्टर का बल्ब थोडा-सा भी लाइट करे तो दोनों coil आपस में शोर्ट हैं।
  3. यदि टेस्टर का बल्ब बिलकुल भी न जले तो वो दोनों coil आपस में शोर्ट नहीं हैं।

b) कोर और प्राइमरी क्वाइल के बीच शोर्टिंग चेक करना

  1. डीसी टेस्टर के किसी एक प्लग को प्राइमरी क्वाइल और एक प्लग को कोर के साथ लगाएं।
  2. यदि टेस्टर का बल्ब थोडा-सा भी लाइट करे तो कोर और प्राइमरी क्वाइल आपस में शोर्ट हैं।
  3. यदि टेस्टर का बल्ब बिलकुल भी लाइट न करे तो कोर और प्राइमरी क्वाइल आपस में शोर्ट नहीं हैं।

c) कोर और सेकेंडरी क्वाइल के बीच शोर्टिंग चेक करना

  1. डीसी टेस्टर के किसी एक प्लग को सेकेंडरी क्वाइल और एक प्लग को कोर के साथ लगायें।
  2. यदि टेस्टर का बल्ब थोडा-सा भी लाइट करे तो कोर और सेकेंडरी क्वाइल आपस में शोर्ट हैं।
  3. यदि टेस्टर का बल्ब थोडा-सा भी लाइट न करे तो कोर और सेकेंडरी क्वाइल आपस में शोर्ट नहीं हैं।


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स्टेबलाइजर में ऑटो ट्रांसफार्मर कैसे काम करता है

क्या आप स्टेबलाइजर रिपेयरिंग का काम सीखना चाहते हैं, क्या आप जानना चाहते हैं कि stabilizer कैसे बनता है, क्या आप जानना चाहते हैं कि स्टेबलाइजर कैसे बनाया जाता है? क्या आप स्टेबलाइजर रिपेयरिंग टिप्स और स्टेबलाइजर रिपेयरिंग गाइड हिंदी में पाना चाहते हैं?

यदि हाँ तो इस पोस्ट को जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम किसी भी प्रकार के स्टेबलाइजर के ट्रांसफार्मर के बारे में पूरी जानकारी हिंदी में देने जा रहे हैं। साथ ही इस पोस्ट में आज हम वोल्टेज स्टेबलाइजर ट्रांसफार्मर सर्किट के बारे में भी बताने जा रहे हैं कि ये कैसे काम करता है?
Voltage stabilizer transformer circuit
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ऑटो ट्रांसफार्मर कैसे काम करता है

इससे पहले कि हम आपको स्टेबलाइजर के ऑटो ट्रांसफार्मर के बारे में बताएं आपका ये जान लेना बहुत ही जरूरी है कि कोई भी एक ऑटो ट्रांसफार्मर काम करता किस प्रकार से है अर्थात auto transformer working principle क्या होता है?

दरअसल किसी भी ऑटो ट्रांसफार्मर के पूरे वाइंडिंग में सामान्यतः एक ही क्वाईल का उपयोग किया जाता है। अर्थात पूरे ऑटो ट्रांसफार्मर के बैंडिंग में एक ही गेज (मोटाई) का क्वाईल इस्तेमाल होता है। इसलिए किसी भी ऑटो ट्रांसफार्मर के क्वाईल में किसी भी 2 पॉइंट के बीच की लम्बाई और उसके बीच का वोल्टेज, एक-दूसरे के समानुपाती होता है।


कहने का तात्पर्य ये है कि यदि ऑटो ट्रांसफार्मर के बैंडिंग में इस्तेमाल किये गए क्वाईल के किसी भी 2 पॉइंट तक तार की लम्बाई 1 मीटर है और उसी पॉइंट के बीच 100 वोल्ट मौजूद है तो ट्रांसफार्मर के पूरे क्वाईल पर अन्य किसी भी 2 पॉइंट के बीच की लम्बाई, यदि 1 मीटर हो तो उस पॉइंट पर 100 वोल्ट ही होगा लेकिन यदि तार की लम्बाई 2 मीटर हो तो उस पॉइंट पर 200 वोल्ट होगा।

अर्थात जैसे-जैसे क्वाईल के तार की लम्बाई बढ़ती जाएगी ठीक उसी अनुपात में वोल्टेज भी बढ़ता जाएगा। इस बात को आप नीचे auto transformer working principal diagram में भी समझ सकते हैं।

Auto transformer working principle

ऊपर ऑटो ट्रांसफार्मर वर्किंग प्रिंसिपल डायग्राम में आप देख सकते हैं कि हमने a मीटर लम्बाई के क्वाइल के बीच 30 वोल्ट माना है तो 7a मीटर लम्बा क्वाईल के बीच 30x7=210 वोल्ट हो जाता है। ठीक उसी प्रकार से ज्यों-ज्यों क्वाईल की लम्बाई a मीटर तक बढ़ती है वोल्टेज भी 30 वोल्ट बढ़ता जाता है।

इसके बाद सबसे अंत में जब क्वाइल की लम्बाई 14a मीटर हो जाती है तो पूरे क्वाइल पर वोल्टेज 30x14=420 वोल्ट हो जाता है। अब मेरे ख्याल से आपने ऑटो ट्रांसफार्मर वर्किंग प्रिंसिपल को बेहतर तरीके से समझ लिया होगा इसलिए चलिए अब स्टेबलाइजर के ऑटो ट्रांसफार्मर के बारे में भी जान लेते हैं।


वोल्टेज स्टेबलाइजर ट्रांसफार्मर सर्किट डायग्राम

इस हैडिंग में हम आपको एक स्टेबलाइजर का ट्रांसफार्मर के बारे में समझाने जा रहे हैं कि आखिर किसी भी स्टेबलाइजर में ट्रांसफार्मर का काम क्या है और स्टेबलाइजर का ट्रांसफार्मर कैसे काम करता है?

हालांकि इस पोस्ट में आज हम आपको स्टेबलाइजर के ऑटो ट्रांसफार्मर के बारे में जो भी बातें बताने जा रहे हैं वो सभी प्रकार के आटोमेटिक स्टेबलाइजर और मैन्युअल स्टेबलाइजर के ट्रांसफार्मर के लिए सही है। लेकिन ये पोस्ट आपको ज्यादा बेहतर तरीके से समझ आ जाए इसलिए इस पोस्ट में हम सिर्फ मैन्युअल स्टेबलाइजर के ट्रांसफार्मर के बारे में ही बताएँगे लेकिन यही नियम आटोमेटिक स्टेबलाइजर के लिए भी लागू होगा।

stabilizer transformer winding formula in hindi

ऊपर stabilizer transformer winding diagram में आप ट्रांसफार्मर के बनावट को निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते हैं।

  1. एक ही गेज (मोटाई) के क्वाईल से पूरे ऑटो ट्रांसफार्मर में बैंडिंग किया गया है। (जबकि स्टेप-अप और स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर में इनपुट और आउटपुट के लिए अलग-अलग साइज़ के क्वाईल तार का इस्तेमाल होता है।)
  2. सभी प्रकार के ट्रांसफार्मर में जब एक परत (level) का क्वाईल बैंडिंग पूरा हो जाता है तब दूसरे परत का बैंडिंग शुरू किया जाता है।
  3. हालाँकि दूसरे लेवल का बैंडिंग पहले लेवल की बैंडिंग के मुकाबले थोड़ा ज्यादा ऊँचाई पर होता है इसलिए हरेक लेवल के बैंडिंग में पिछले लेवल के बैंडिंग के मुकाबले ज्यादा लम्बाई का क्वाईल लग जाता है।
  4. जब क्वाईल की लम्बाई ज्यादा होगी तो जाहिर सी बात है कि उससे निकले हुए तार पर वोल्टेज भी थोडा-बहुत ज्यादा जरूर होगा।
  5. लेकिन चूंकि किसी भी लेवल की बैंडिंग में पिछले लेवल की अपेक्षा थोड़ा-बहुत ही क्वाईल ज्यादा लगता है इसलिए उस लेवल के क्वाईल के आउटपुट वोल्टेज में ज्यादा अंतर नहीं होता है। इसलिए हम मानकर चल रहे हैं सभी क्वाईल के आउटपुट पर एक समान औसत में वोल्टेज मिल रहा है।
  6. स्टेबलाइजर ट्रांसफार्मर में एक के बाद एक कुल मिलाकर 14 लेवल (परत) में क्वाईल की बैंडिंग की गयी है और हरेक लेवल के क्वाईल को हमने अंडाकार रूप में दर्शाया है।
  7. 14 स्टेप में क्वाइल की बैंडिंग होने के बावजूद भी ट्रांसफार्मर में से कनेक्शन के लिए सिर्फ 10 तार ही बाहर निकाला जाता है।
  8. स्टेबलाइजर ट्रांसफार्मर का सबसे नीचे वाला तार कॉमन अर्थात ग्राउंड के लिए होता है इसलिए उस पर 0 वोल्ट मौजूद रहेगा।
  9. स्टेबलाइजर ट्रांसफार्मर का दूसरा तार रिले किट को 12 वोल्ट का सप्लाई देने के लिए निकाला जाता है। अर्थात इस तार पर 12 ac वोल्ट मौजूद रहेगा। यहाँ ध्यान रहे कि पहले लेवल के बाईंडिंग से ही 0v और 12v दोनों का तार निकाल दिया जाता है क्योंकि अगले बैंडिंग पर कम-से-कम 30v होता है।
  10. अभी तक तो दोनों तार बैंडिंग के शुरुआत से अर्थात नीचे से निकाला गया था लेकिन अब रोटरी स्विच पर लगाने के लिए बाकी का 8 तार ऊपर से निकाला जाएगा।
  11. बीच के किसी भी स्टेप के क्वाईल से एक भी कनेक्शन तार नहीं निकाला जायेगा क्योंकि उसकी कोई जरूरत ही नहीं है। लेकिन आपको समझने के लिए हमने बचे हुए लेवल के क्वाईल पर भी उसका आउटपुट वोल्टेज दर्शा दिया है।
  12. महत्त्वपूर्ण बात, ऊपर ट्रांसफार्मर डायग्राम में हमने सभी आउटपुट तार पर जो वोल्टेज दर्शाया है उसका मतलब ये हुआ कि किसी भी स्थिति में यदि दर्शाए गए वोल्टेज से ज्यादा वोल्ट उस तार पर आ जाएगा तो ट्रांसफार्मर जल जाएगा।
  13. अर्थात किसी भी हालत में ट्रांसफार्मर के किसी भी तार पर दर्शाए गए वोल्टेज से ज्यादा वोल्ट नहीं होना चाहिए। यदि ज्यादा वोल्टेज होगा तो ट्रांसफार्मर का क्वाईल उसे बर्दाश्त नहीं कर पाएगा और वो जल जाएगा।
  14. इस ट्रांसफार्मर में किस तार पर इनपुट कनेक्शन और किस तार पर आउटपुट कनेक्शन किया जाता है इसके बारे में हम अगले पोस्ट में बात करेंगे।

अब मुझे पूरी उम्मीद है कि आप ऑटो ट्रांसफार्मर के कार्य सिद्धांत auto transformer stabilizer circuit, stabilizer transformer winding formula in hindi और stabilizer transformer winding diagram को अच्छी तरह से समझ गए होंगे और ये भी समझ गए होंगे कि स्टेबलाइजर में ट्रांसफार्मर कैसे काम करता है।


यदि इस पोस्ट को समझने में आपको कहीं कोई दिक्कत हो या कुछ संशय हो तो कमेन्ट करके हमें जरूर बातें और यदि ये पोस्ट आपको पसंद आए तो सोशल मीडिया पर इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और इस वेबसाइट को सब्सक्राइब करना भी न भूलें।

प्रोटोन, इलेक्ट्रान, न्यूट्रॉन क्या है और इनमें क्या अंतर है

यदि आपने वर्ग 10 तक की पढाई की होगी तो आपने प्रोटोन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रान के बारे में जरूर सुना होगा। लेकिन यदि आपको इसके बारे में नहीं पता है और आप रिपेयरिंग के काम में रुचि रखते हैं तो आपको इन तीनों के बारे में जरूर पता होनी चाहिए।

आपको पता होना चाहिए कि प्रोटोन क्या है, इलेक्ट्रान क्या है, न्यूट्रॉन क्या है? प्रोटोन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रान में क्या अंतर है? यदि आपको इनके बारे में पता होगा तो इलेक्ट्रॉनिक्स को समझने में आपको बहुत आसानी होगी।

यदि आप इनके बारे में जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम प्रोटोन न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रान की पूरी जानकारी हिंदी में देने जा रहे हैं। हम आपको इनके बारे में बेहतर तरीके से समझा सकें इसलिए सबसे पहले आपको पदार्थ, अणु और परमाणु के बारे में जरूर पता होनी चाहिए जिसके बारे में हम नीचे सबसे पहले बताने जा रहे हैं।

proton electron neutron definition in hindi

1) Matter kya hai या पदार्थ क्या है और कितने प्रकार का होता है?

जो वस्तु कुछ स्थान घेरती है या जिसमें कुछ भार होता है उसे matter या पदार्थ कहा जाता है। साधारणतः इस धरती पर हम जो भी देखते हैं या महसूस करते हैं वो सभी पदार्थ होता है। इस धरती पर मुख्य रूप से 3 अवस्था में पदार्थ पाया जाता है।

I) ठोस पदार्थ क्या है?

जो पदार्थ ठोस रूप में होता है, जिसे हम देख सकते हैं, स्पर्श कर सकते हैं और जिसका अपना रूप होता है उस पदार्थ को ठोस पदार्थ कहते हैं। मोबाइल, लैपटॉप, टीवी. बोतल, कपड़ा, लकड़ी इत्यादि सभी ठोस पदार्थ कहलाते क्योंकि इसे हम देख सकते हैं, स्पर्श कर सकते हैं और इसका अपना एक ख़ास आकार होता है।

II) द्रव पदार्थ क्या है?

जिस पदार्थ को हम देख और छू तो सकते हैं लेकिन उसका अपना कोई आकार नहीं होता है, ऐसे पदार्थ को जिस ठोस पदार्थ में रखा जाये तो वो उसी पदार्थ का रूप ले ले वो द्रव पदार्थ कहलाता है। पानी, तेल, शराब, इत्यादि सभी द्रव पदार्थ होते हैं क्योंकि इन्हें देख और छू तो सकते हैं लेकिन इनका अपना कोई रूप नहीं होता है।

उदाहरण लेते हैं पानी की, पानी एक ऐसा पदार्थ है जिसे हम छूते भी हैं और इसे देखते भी हैं लेकिन ये ठोस पदार्थ न होकर द्रव पदार्थ होता है क्योंकि इसका अपना कोई निश्चित आकार नहीं होता है। पानी को जिस बर्तन में भी रखा जाता है, पानी का आकार उसी बर्तन के जैसा हो जाता है।

III) गैस या गैसीय पदार्थ क्या होता है?

जिस पदार्थ को न तो हम देख सकते हैं, न ही छू सकते हैं, न ही उसका कोई आकार होता है, लेकिन जिसे हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं उस पदार्थ को गैसीय पदार्थ कहा जाता है। हवा और इसमें घुले हुए विभिन्न प्रकार के गैस, गैसीय पदार्थ के श्रेणी में ही आते हैं क्योंकि इन्हें सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

2) Molecule या अणु क्या होता है?

अणु किसी भी पदार्थ का वो सबसे छोटा कण होता है जिसमें उस पदार्थ का सारा गुण पाया जाता है। चूँकि अणु पदार्थ का ही छोटा रूप होता है इसलिए एक अणु भी पदार्थ ही होता है। Molecule का हिंदी नाम ही अणु होता है।

अणु के उदाहरण, चीनी का एक दाना ले लीजिये और उसे छोटे-छोटे कण में चूर दीजिये। अब उन कणों में से कोई एक कण अपने मुंह में डालिए तो आपको वो कण भी चीनी के जैसे मीठा ही लगेगा। अर्थात चीनी के कण में भी चीनी का सारा गुण मौजूद होता है।

फिर इसके बाद इनमें से एक कण को लीजिये और उसे भी चूर दीजिये (सिर्फ उदाहरण के लिए मान लीजिये)। और फिर इसके बाद जो कण आपको मिलेगा उसे भी चूर दीजिये और सभी के स्वाद को अपने मुंह में चेक कीजिये।

एक समय ऐसा आएगा जब कोई कण आपको मीठा नहीं लगेगा (माना जा रहा है)। जो कण आपको मीठा नहीं लगेगा उसको आपने जिस कण को चूरकर प्राप्त किया था वो ही अणु कहलायेगा क्योंकि चीनी का गुण सिर्फ उसी कण तक है और उसके बाद उसके छोटे टुकड़े को चुरने के बाद चीनी का गुण समाप्त हो जाता है।

3) Atom या परमाणु क्या होता है?

ऊपर हमने अणु के बारे में बताया था कि अणु किसी भी पदार्थ का वो सूक्ष्म कण होता है जिसमें उस पदार्थ का सभी गुण मौजूद होता है। लेकिन परमाणु किसी भी पदार्थ का वो सूक्ष्तम (छोटे-से-छोटा) कण होता है जिसको उससे ज्यादा टुकड़ा नहीं किया जा सकता। परमाणु में किसी भी पदार्थ का सारा गुण मौजूद नहीं होता है।

परमाणु एक मीटर लम्बाई के अरबवें हिस्से से भी छोटा होता है और परमाणु के केंद्र को नाभिक या केन्द्रक कहते हैं।

सिर्फ उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि मोबाइल एक पदार्थ है। अब इस मोबाइल का बैटरी इसी मोबाइल का एक टुकड़ा होगा लेकिन ये अणु नहीं होगा क्योंकि बैटरी में मोबाइल का गुण नहीं है। लेकिन यदि इस बैटरी को और टुकड़ों में विभक्त न किया जा सके तो ये परमाणु कहलायेगा।

पदार्थ, अणु और परमाणु की परिभाषा से आप निम्नलिखित बातों को समझ सकते हैं।


  1. हरेक पदार्थ में अणु और परमाणु मौजूद होता है। अर्थात हरेक पदार्थ, अणु और परमाणु से मिलकर बना होता है।
  2. हरेक अणु में परमाणु मौजूद होता है लेकिन पदार्थ नहीं मौजूद होता है। अर्थात हरेक अणु, कई परमाणुओं से मिलकर बना होता है।
  3. किसी भी परमाणु में न तो अणु मौजूद होता है और न ही पदार्थ। अर्थात हरेक परमाणु किसी भी पदार्थ का सबसे सूक्षतम रूप होता है जिसे विभक्त नहीं किया जा सकता।
  4. पदार्थ > अणु > परमाणु


परमाणु की संरचना कैसी होती है?

ऊपर हमने बताया कि परमाणु किसी भी पदार्थ का सबसे छोटा कण होता है जिसे विभाजित नहीं किया जा सकता। लेकिन एक बात ये भी है कि परमाणु भी निम्नलिखित तीन मौलिक कणों से मिलकर बना होता है।

parmanu ki sanrachna in hindi

1) प्रोटोन (Proton) क्या है?

प्रोटोन किसी भी परमाणु के नाभिक में मौजूद होता है और प्रोटोन पर धनात्मक + आवेश होता है।

2) इलेक्ट्रान (Electron) क्या है?

इलेक्ट्रान किसी भी परमाणु के नाभिक के चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में चक्कर लगाता हुआ मौजूद होता है और इलेक्ट्रान पर ऋणात्मक - आवेश होता है।

इलेक्ट्रान की विशेषता क्या है?

किसी भी पदार्थ के परमाणु के इलेक्ट्रान से सम्बंधित कुछ बातें नीचे बताये जा रहे हैं।

  1. प्रोटोन किसी भी परमाणु के केन्द्रक में मौजूद होता है जबकि इलेक्ट्रान उसी केन्द्रक के चारों ओर बने कुछ कक्षाओं पर चक्कर काटता रहता है।
  2. किसी परमाणु में कितने प्रोटोन या इलेक्ट्रान हैं उसी आधार से उस परमाणु के केंद्रक के चारों ओर कक्षा बने होते हैं।
  3. पहली कक्षा में अधिकतम 2 इलेक्ट्रान, दूसरी कक्षा में 8, तीसरी कक्षा में 18, इत्यादि इलेक्ट्रान अधिकतम होते हैं।
  4. जब तक पिछली कक्षाओं पर इलेक्ट्रान की संख्या पूरी नहीं होती है तब तक अगले कक्षा में इलेक्ट्रान नहीं जा सकते।
  5. किसी भी परमाणु के nवें कक्षा में अधिकतम 2n² इलेक्ट्रान ही हो सकते हैं। किस कक्षा में कितने इलेक्ट्रान होंगे इसी सूत्र से आप इलेक्ट्रान की संख्या निकाल सकते हैं।
  6. परमाणु में उतना ही कक्षा होता है जितने में इलेक्ट्रान आ जाये, बिना इलेक्ट्रान का कोई कक्षा नहीं होता।

प्रोटोन और इलेक्ट्रान में संबंध


  1. किसी भी पदार्थ के परमाणु में प्रोटोन की संख्या और इलेक्ट्रान की संख्या बराबर होती है। अर्थात किसी भी परमाणु में + आवेश और - आवेश समान संख्या में होते हैं।
  2. किसी भी पदार्थ के एक परमाणु के इलेक्ट्रान और प्रोटोन की संख्या उस पदार्थ पर निर्भर करता है। यदि किसी पदार्थ के एक परमाणु में 5-5 प्रोटोन और न्यूट्रॉन हैं तो दुसरे पदार्थ के एक परमाणु में इससे अलग संख्या में भी प्रोटोन और न्यूट्रॉन हो सकते हैं।
  3. प्रोटोन पर धन विद्युत् और इलेक्ट्रान पर ऋण विद्युत् समान मात्रा में होता है।

3) न्यूट्रोन (Neutron) क्या है?

न्यूट्रॉन में कोई आवेश नहीं होता है और ये आवेश रहित होता है। परमाणु में भी न्यूट्रॉन नाभिक में होता है।

नोट:- हमारा मकसद सभी पाठकों को इलेक्ट्रॉनिक्स और रिपेयरिंग के बारे में गहराई से पूरी जानकारी प्रदान कराना है। इसलिए इस पोस्ट का लिखना बेहद ही जरूरी था क्योंकि ये इलेक्ट्रॉनिक्स का बेसिक है।

हमने आज तक जो भी पोस्ट लिखा वो सब अपने टैलेंट और अपने ज्ञान के अनुसार लिखा है और आगे भी ऐसा ही होगा लेकिन इस पोस्ट के बारे में गहराई से और बेहतर तरीके से पूरी बात बताने के लिए हमने एक बार फिर से अपने सिलेबस के फिजिक्स किताब का सहारा लिया है।


हमारा ये पोस्ट आपको कैसा लगा कमेन्ट करके हमें जरूर बताइयेगा और यदि पोस्ट पसंद आये तो सोशल मीडिया पर इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना भी न भूलें। इलेक्ट्रॉनिक्स और रिपेयरिंग से सम्बंधित सभी जानकारी के लिए इस वेबसाइट को सब्सक्राइब करना भी न भूलें।

बिना मीटर के अपना बिजली बिल कैसे चेक करें?

Electricity bill check: बिजली की पहुँच आजकल लगभग सभी घरों में हो गई है और आपने भी बिजली का कनेक्शन जरूर लिया होगा। कुछ साल पहले तक जब बिजली कनेक्शन सरकारी थी तो उस समय सभी लोगों को बिजली बिल के लिए एक निश्चित राशि का ही भुगतान करना पड़ता था। लेकिन बिजली अब प्राइवेट कंपनी का हो गया है और कोई भी प्राइवेट कंपनी अपने मुनाफे और नुकसान के बारे में अच्छी प्रकार से समझती है।

प्राइवेट बिजली कंपनी ने अब हरेक बिजली उपभोक्ताओं के घर में बिजली मीटर लगवाना अनिवार्य कर दिया है। चाहे आप घरेलु उपयोग के लिए बिजली कनेक्शन लें या किसी भी प्रकार के व्यापर के लिए, आपको आपके हरेक कनेक्शन के लिए एक-एक बिजली मीटर लगवाना जरूरी हो गया है। आप जितने यूनिट बिजली का इस्तेमाल करेंगे वो सब बिजली मीटर में रिकॉर्ड हो जाता है और फिर उसका electric meter reading करके आपको बिजली बिल दिया जाता है और आपको उसके अनुसार ही बिजली बिल का भुगतान करना होता है और बिजली ऑफिस जाकर बिजली का बिल जमा करना पड़ता है।

हालांकि बिजली बिल का भुगतान करने की ये प्रक्रिया बहुत ही साधारण और सभी उपभोक्ताओं के हित के लिए ही है। लेकिन कई बार ऐसा सुनने में आता है कि बिजली ऑफिस ने किसी उपभोक्ता को इस्तेमाल से ज्यादा बिजली बिल भेज दिया है। उपभोक्ताओं की शिकायत होती है कि उनका बिजली बिल उनके बिजली के इस्तेमाल से दोगुना-तिगुना आ जाता है।
Bijli ka bill check karna hai
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यदि किसी कंज्यूमर का बिजली बिल हजारों लाखों रूपये में आए तो ये बात आसानी से कही जा सकती है कि ऐसा बिजली मीटर में टेक्नीकल खराबी की वजह से हुआ है। लेकिन यदि किसी उपभोक्ता की शिकायत हो कि उनका बिजली बिल इस्तेमाल से दोगुना-तिगुना या थोडा-बहुत ही ज्यादा आ रहा है तो हो सकता है कि वो कंज्यूमर सचमच में ही उतनी बिजली का उपयोग करते हों लेकिन उन्हें इस बात का अहसास नहीं हो।

यदि आपके साथ भी ऐसी ही कोई समस्या हो और आप भी जानना चाहते हैं कि अपना बिजली बिल कैसे जाने तो आज का हमारा ये पोस्ट जरूर पढ़ें। आज के इस पोस्ट में हम बिना किसी इलेक्ट्रिक मीटर के इस्तेमाल के आपके घर का बिजली बिल ज्ञात करने के लिए हिंदी में सिखायेंगे। यदि आपकी याद रखने की क्षमता तेज है तो ठीक है अन्यथा आप एक कॉपी और एक कलम ले लें और फिर जैसे-जैसे हम पोस्ट में बताते जायेंगे आप कॉपी पर उतारते जाइएगा।


बिजली बिल का रेट किस तरह से होता है?

Bijli bill rate: हमारे घर के बिजली की खपत को यूनिट में मापा जाता है। जब कोई भी कंज्यूमर अपने घर में सिंपल इस्तेमाल करने के लिए बिजली का कनेक्शन लेते हैं तो हरेक महीना उन्हें 50 यूनिट तक बिजली फिक्स रेट पर दिया जाता है। लेकिन यदि किसी महीने में आपका बिजली खपत 50 यूनिट से ज्यादा हो जाये तो 50 यूनिट तक का तो आपको फिक्स रेट ही देना होगा लेकिन 50 से ज्यादा जितना यूनिट का खपत करेंगे उसके लिए आपको नए दर से ज्यादा बिजली बिल का भुगतान करना होगा।

मान लेते हैं कि घरेलू इस्तेमाल में 50 यूनिट तक बिजली खपत के लिए 250 रुपया बिजली यूनिट रेट फिक्स किया हुआ है। आपने बिजली का कनेक्शन लिया हुआ है लेकिन किसी वजह से किसी महीने आप एक भी यूनिट बिजली का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। तो ऐसी स्थिति में भी आपको पूरे 250 रूपये का भुगतान करना ही होगा। साथ ही यदि आप 50 यूनिट तक कितना भी यूनिट का खपत क्यों न करें फिर भी आपका बिजली बिल 250 रुपया का ही आएगा। इस तरह से 1 यूनिट बिजली यूनिट की दर 5 रुपया पड़ता है।

अब मानकर चलते हैं कि 50-100 यूनिट का बिजली यूनिट रेट 7 रुपया प्रति यूनिट और 100-200 यूनिट का बिजली यूनिट रेट 10 रुपया प्रति यूनिट है। अब मान लेते हैं कि किसी महीने में आप 70 यूनिट बिजली का इस्तेमाल कर लेते हैं। तो 70 यूनिट का बिजली बिल

= 50 यूनिट + 20 यूनिट
= 250rs + (20 X 7) rs
= 250rs + 140 rs
= 390 rs

∴ 70 यूनिट का बिजली बिल = 390 रूपये

ऊपर आप देख सकते हैं कि पहले 50 इकाई (इकाई=यूनिट) बिजली के लिए तो फिक्स रेट 250 रूपये ही लगा है लेकिन उसके बाद के यूनिट के लिए नया रेट लागू हो गया है। एक बात का ध्यान रहे कि ये जो नया रेट लागू हुआ है वो 50-100 यूनिट्स बिजली के लिए है। यदि किसी महीने में आपका विद्युत इस्तेमाल 100 यूनिट से भी ज्यादा हो जाये तो उसके लिए फिर से नया रेट लागू होगा।


बिजली बिल से सम्बंधित इलेक्ट्रिक राशि

खुद से बिजली का बिल चेक करना है तो उससे पहले आपको निम्नलिखित इलेक्ट्रिक राशियों का ज्ञान होना जरूरी है। पहले नीचे बताये जा रहे राशियों को समझ लें और फिर इसके बाद हम खुद से बिजली बिल पता करने का तरीका बतायेंगे।

1) What is a Watt: वाट क्या है?

जिस प्रकार से कोई बाईक 100 की स्पीड में चलता है तो आप समझ जाते हैं कि 100 जो है वो बाईक के दौड़ने की गति है। ठीक उसी प्रकार से वाट भी विद्युत खपत होने की गति होती है। अर्थात किसी भी उपकरण का वाटेज, उस उपकरण के बिजली खपत करने की गति को दर्शाता है। यदि कोई उपकरण 100 वाट का है तो इसका मतलब ये हुआ कि वो उपकरण एक घंटा में 100 वाट बिजली की खपत करेगा। वाट को W से दर्शाते हैं अर्थात 1 वाट को हम 1W भी लिख सकते हैं।

2) What is KiloWatt: किलोवाट क्या है?

1000 वाट बराबर एक किलो वाट होता है। किलोवाट को kW से सूचित किया जाता है।
1KW=1000W

3) What is Watt Hour: वाट घंटा क्या है?

बिजली की कुल खपत को वाट घंटा से दर्शाया जाता है। वाट घंटा को WH से भी सूचित किया जाता है। इलेक्ट्रिक उपकरण के वाट और इस्तेमाल किये गए समय को गुना करने पर वाट घंटा प्राप्त होता है। यदि आप 1W के उपकरण को लगातार 1 घंटा तक उपयोग करते हैं तो इसका मतलब हुआ कि आपने 1 वाट घंटा बिजली का खपत किया है। और यदि आप लगातार 2 घंटे तक 500 वाट के उपकरण का इस्तेमाल करते हैं तो कुल विद्युत की खपत WH

=500 वाट x 2 घंटा {वाट घंटा = वाट x घंटा}
= 1000 वाट घंटा
= 1000 WH

4) What is KiloWatt Hour: किलोवाट घंटा क्या है?

1000 वाट घंटा बराबर 1 किलोवाट घंटा होता है। किलोवाट घंटा को kWH से भी सूचित किया जाता है।
1kWH=1000WH

5) What is Unit of power: यूनिट क्या है या इकाई क्या है?

बहुत लोगों के मन में ये सवाल घुमते रहता है कि एक यूनिट कितना होता है और 1 यूनिट में कितने वाट होते हैं। तो हम आपको बताना चाहेंगे कि 1 किलोवाट घंटा को ही एक यूनिट या एक इकाई कहा जाता है। बिजली बिल हमें इसी यूनिट के आधार पर आता है।
1000WH = 1kWH = 1 यूनिट = 1 इकाई


खुद से अपना बिजली बिल चेक कैसे करें?

यदि आपको बिजली का बिल चेक करना है और यदि आपके पास स्मार्टफोन है तो प्ले स्टोर पर आपको बहुत सारा बिजली बिल चेक करने वाला अप्प्स मिल जाएगा। लेकिन हम यहाँ जो बिजली बिल चेक करने का तरीका बता रहे हैं उसके लिए आपको सिर्फ एक कॉपी और एक कलम की जरूरत पड़ेगी।
  1. सबसे पहले अपने घर में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों की एक लिस्ट बनाएं। ध्यान रहे कि इसमें आपके घर में इस्तेमाल होने वाले सारे उपकरण आ जाने चाहिए।
  2. आपके कौन-से उपकरण कितने वाट के हैं उसे भी अपने कॉपी पर उतार लें।
  3. आप किस उपकरण का दिन भर में कितने घंटे इस्तेमाल करते हैं वो भी अपने कॉपी पर उतार लें।
  4. इस प्रक्रिया को आप नीचे के उदाहरण से भी समझ सकते हैं।

वाट
घंटा
वाट घंटा
बल्ब
9W
x 40H (5 बल्ब)
= 360 WH
पंखा
65W
x 20H (2 पंखा)
= 1300 WH
मोबाइल चार्जर
3W
x 12H (4चार्जर)
= 36 WH
टेलीविज़न
70W
x 3H
= 210 WH
सेट टॉप बॉक्स
20W
x 3H
= 60 WH
आयरन
500W
x 3H
= 1500 WH



कुल = 3466 WH
  1. ऊपर टेबल में आप देख सकते हैं कि हमने ठीक उसी प्रकार से टेबल बनाया है जिस प्रकार से एक आम घर में इलेक्ट्रिक उपकरणों के इस्तेमाल किये जाते हैं। यदि आपके घर में इससे ज्यादा या इससे कम उपकरण इस्तेमाल किये जाते हैं तो आप अपने इस्तेमाल के अनुसार वाले उपकरणों का ही टेबल बनाइएगा।
  2. दूसरी पंक्ति में आप देख सकते हैं कि बल्ब को हमने 9W का माना है क्योंकि अधिकांश घर में 9W के बल्ब ही इस्तेमाल होते हैं। इसके साथ ही बाकी सभी उपकरणों के वाट्स भी हमने लिख दिया है। लेकिन आपका उपकरण जितने वाट का होगा आप उतना वाट ही अपने टेबल में लिखियेगा।
  3. चूँकि घर के हरेक कमरे में अलग-अलग बल्ब लगाया जाता है इसलिए हमने 5 बल्ब मानकर चला है। साथ ही बल्ब चूँकि सिर्फ दिन में ही जलाया जाता है इसलिए हमने मानकर चला है कि हम दिन में सिर्फ 8 घंटा ही बल्ब जलाते हैं। तो इस तरह से बल्ब के लिए कुल घंटा = 8x5 = 40 घंटा।
  4. इसी प्रकार से हमने सभी उपकरणों के इस्तेमाल होने का पूरा घंटा लिख दिया है।
  5. इसके बाद चौथी पंक्ति में हमने सभी उपकरण के वाट और घंटा को गुना करके WH लिख दिया है।
  6. और फिर सबसे नीचे में हमने सभी WH को जोड़कर बिजली के टोटल खपत को कैलकुलेट कर लिया जो कुल मिलाकर 3466 WH आया है।
  7. इसका मतलब ये हुआ कि एक दिन में कुल मिलाकर आप 3466 वाट घंटा बिजली की खपत कर देते हैं।
  8. अब 3466 वाट घंटा
= 3.466 किलोवाट घंटा
= लगभग 3.5 किलोवाट घंटा
= 3.5 यूनिट/इकाई {∵ 1 किलोवाट घंटा = 1 यूनिट}

अर्थात आपके घर में रोजाना साढ़े तीन यूनिट विद्युत खपत होती है। यहाँ एक बात का ध्यान रहे कि किसी एक दिन आपने इतना यूनिट बिजली का उपयोग किया है तो जरूरी नहीं है कि पूरे महीने आप इसी तरह से विद्युत का उपयोग करेंगे। लेकिन फिर भी यहाँ आपको समझाने के लिए मान लेते हैं कि पूरे महीने आप इसी तरह से बिजली का उपयोग करेंगे। इसलिए, 30 दिन की कुल बिजली खपत

= 3.5 यूनिट x 30
= 105 यूनिट

इसका मतलब ये हुआ कि पूरे महीने आप 105 यूनिट बिजली का उपयोग करते हैं। अब इसके बाद आप इस यूनिट पर अपने विद्युत का रेट लगा दीजिये। उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि 0-50 यूनिट विद्युत का रेट 250 रुपया, 50-100 यूनिट बिजली का रेट 7 रुपया प्रति यूनिट और 100-200 यूनिट बिजली का रेट 10 रुपया प्रति यूनिट है। तो आपके एक महीने का बिजली बिल होगा...105 यूनिट

= 50 यूनिट + 50 यूनिट + 5 यूनिट
= 250 रुपया + (50x7) रुपया + (5x10) रुपया
= 250 रुपया + 350 रुपया + 50 रुपया
= 650 रुपया {समाप्त...}

नोट:- वाट और यूनिट का सम्बन्ध वोल्ट से भी है। यहाँ जो भी कैलकुलेशन बताया गया है वो 220V के लिए बताया गया है। यदि आपके यहाँ इसका आधा वोल्टेज ही है तो आपके बिजली का खपत भी आधा ही होगा।


उम्मीद है कि आपको समझ आ गया होगा कि आपके बिजली का मीटर किस प्रकार से आपके बिजली बिल को कैलकुलेट करता है और आपका बिजली बिल किस आधार पर आता है। यदि इस पोस्ट को समझने में आपको कहीं कोई परेशानी हो या आपका कोई सवाल हो तो कमेन्ट करके हमें जरूर बताएं। यदि ये पोस्ट आपको पसंद आया हो तो इसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर कीजियेगा और इस वेबसाइट को सब्सक्राइब करना भी न भूलियेगा।

DVD player को फ्री में ऑडियो एम्पलीफायर में कैसे बदलें?

जब smartphone का चलन नहीं था तब बहुत सारे लोगों के घरों में television के माध्यम से film देखा जाता था। लेकिन सिर्फ टेलीविज़न के रहने मात्र से लोग उस पर कोई movie नहीं देख सकते थे। सिर्फ टीवी के रहते हुए लोग सिर्फ-और-सिर्फ एक फ्री का indian चैनल DD national ही देख सकते थे या फिर केबल के माध्यम से ही किसी दूसरे channel को देख सकते थे।
dvd player repair service
Wikimedia
लेकिन उस समय cable का connection भी बहुत सारे गाँवों में नहीं पहुंचा था जिस वजह से लोगों को या तो सिर्फ नेशनल चैनल देखकर ही रह जाना पड़ता था या फिर अपने मनपसंद के फिल्म देखने के लिए उन्हें dvd player या vcd player खरीदना पड़ता था। लेकिन उस समय में dvd, vcd के मुकाबले ज्यादा costly पड़ता था जिस वजह से बहुत सारे लोग डीवीडी के बजाये वीसीडी ही खरीदा करते थे।


एक समय में बहुत सारे लोगों ने अपने budget के अनुसार dvd या vcd खरीदा था। इन दोनों में ही गोलाकार कांच का एक कैसेट लगता था। AV code की मदद से dvd/vcd पर चलने वाले video/audio को टीवी पर देखा और सुना जा सकता था। लेकिन इसमें लगने वाला original disc (कैसेट) बहुत ही महंगा पड़ता था जिस वजह से लोग बहुत समय के बाद थोडा-बहुत कैसेट खरीद लिया करते थे और लम्बे समय तक एक ही फिल्म को बार-बार चलाकर देखा करते थे।

  • Disc क्या है और ये कितने तरह का होता है?
  • DTH क्या है और ये कितने तरह का होता है?

लेकिन ऐसे ही लोगों के लिए dth जैसे कि खुशियों की सौगात लेकर आ गया। DTH पर लोगों को मुफ्त में ही एक से बढ़कर एक free channel देखने को मिलने लगा। इन सभी free चैनल पर लोगों को मुफ्त में ही अपने मनपसंद movie, song, tv show, serial, breaking news इत्यादि सभी कुछ देखने को मिलने लग गया।

लोगों के बीच खुशियों की सौगात लेकर आने वाले dth का बुरा परिणाम ये रहा कि मनोरंजन के इस दौर में धीरे-धीरे करके लोग dvd और vcd को भूलने लगे। आज के समय में स्थिति ये है कि शायद ही किसी व्यक्ति के घर में इसका इस्तेमाल किया जाता होगा। जाहिर-सी बात है कि जब लोगों के पास दुनियाभर के तमाम मनोरंजन फ्री में ही मौजूद हों तो भला पैसा लगाकर dvd के लिए कैसेट कौन खरीदना चाहेगा?

अपने बेकार पड़े dvd और vcd player को इस तरह से smart बना सकते हैं।


यदि आपने भी कभी dvd या vcd खरीदा था और अभी वो बेकार पड़ा हुआ है तो ये पोस्ट आपके लिए ही है। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने वाले हैं जिसे पढने के बाद आपको ये अहसास होगा कि आज भी dvd आपके लिए important है और इसका सही इस्तेमाल किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर dvd का किस तरह से सही इस्तेमाल किया जा सकता है।

1) DVD में pen drive और memory card लगाकर भी film देख सकते हैं।

जिस समय लोगों ने dvd का इस्तेमाल करना छोड़कर dth को अपनाया था उस समय pen drive और memory card के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता हुआ करता था। लेकिन आज इसके बारे में सभी लोगों को पता है और शायद ये आपके पास भी उपलब्ध हो। यदि आपके पास पेन ड्राइव है तो ठीक है लेकिन यदि आपके पास मेमोरी कार्ड है तो आप 20 रूपये का एक card reader खरीदकर अपने memory card को ही pen drive की शक्ल दे सकते हैं।

इसके बाद आप इस pen drive को डीवीडी के usb port में लगा दें और dvd के मुख्य तार को बिजली बोर्ड में लगाकर उसमें supply दे दें। इस बात का ध्यान रहे कि यदि dvd में कोई कैसेट लगा हुआ होगा तो dvd पहले उस कैसेट को ही read करने की कोशिश करेगा। इसलिए आप चाहें तो सबसे पहले उस कैसेट को बाहर निकाल दें। इसके बाद चूंकि डीवीडी में सिर्फ pen drive ही लगा हुआ होगा इसलिए वो इसी को read करेगा।


अब कुछ ही second में आपका dvd उस पेन ड्राइव को read कर लेगा और उसमें मौजूद mp3 audio song को play कर देगा। अब यदि आप चाहें तो av cord लगाकर इस गाने को अपने tv पर भी सुन सकते हैं या फिर चाहें तो अपने dvd में ही speaker को लगाकर उसमें भी गाना सुन सकते हैं।

लेकिन यदि आपके pen drive में video भी मौजूद हो और आप चाहते हैं कि आपके डीवीडी में song के बजाये विडियो ही चले, तो इसके लिए आपको dvd के रिमोट से विडियो को select करना होगा। इतना ही नहीं, यदि आपके pen drive में कोई image या फोटो मौजूद होगा तो आप remote से फोटो को चुनकर उस फोटो को भी अपने tv screen पर देख सकते हैं।

Note:- लगभग सभी तरह के dvd में usb port लगा हुआ होता है इसलिए इसमें तो कोई दिक्कत नहीं है लेकिन यदि बात करें vcd की तो कुछ ख़ास तरह के vcd में ही usb port लगा होता है। इसलिए यदि आपके vcd में usb port न हो तो आप ये लाभ नहीं उठा सकते हैं। यदि आप इस तरह के vcd में भी ये लाभ लेना चाहेंगे तो इसके लिए आपको उसमें अलग से करीब 100 रूपये का एक usb kit लगाना होगा। लेकिन आप नीचे बताये जा रहे topic का लाभ अपने vcd में जरूर उठा सकते हैं।

2) DVD और VCD को audio amplifier में भी बदल सकते हैं।

Dth के आ जाने से भले ही लोगों ने dvd और vcd का इस्तेमाल करना छोड़ दिया हो लेकिन होम थियेटर और एम्प्लीफायर मशीन पर तेज आवाज में गाने सुनने का क्रेज आज भी लोगों के सर चढ़कर बोलता है। यदि आप भी amplifier से तेज आवाज में गाने सुनने के शौक़ीन हैं तो इसके लिए आपको अलग से मशीन खरीदने की जरूरत नहीं है।

आप चाहें तो ऊपर बताये गए तरीके से pen drive या SD card लगाकर भी अपने dvd में गाना या विडियो देख सकते हैं या फिर चाहें तो अपने mobile पर play हो रहे audio को भी अपने dvd और vcd में speaker लगाकर तेज sound में सुन सकते हैं। इसके लिए आपको अलग से सिर्फ 30 रूपये का एक headphone with av cord खरीदना होगा।

इस कॉर्ड में एक तरफ से हैडफ़ोन वाला pin लगा होता है जिसे आपको अपने mobile के headphone वाले socket में लगाना होगा। दूसरी तरफ से इस cord में av वाला 2 pin लगा होता है जिसे आपको अपने dvd या vcd के audio output वाले उसी socket में लगाना होगा जिस सॉकेट में आप tv के av cable के audio वाले दोनों pin लगाया करते थे।

Congrats, इतना कर लेने के बाद आप अपने mobile में कोई भी विडियो या audio song चलाइये और अपने dvd को इलेक्ट्रिक बोर्ड में जोड़कर उसमें supply दे दीजिये। इसके साथ ही अपने dvd के speaker वाले सॉकेट में कोई अच्छा सा स्पीकर लगा दीजिये, बस इसके बाद इस speaker में आपको आपके mobile पर चल रहे गाने सुनाई देने लग जायेंगे।

यदि आप dvd के speaker से निकलने वाले आवाज को कम या ज्यादा करना चाहें तो mobile से भी volume को कम या ज्यादा कर सकते हैं या फिर इसके लिए dvd में लगे हुए volume का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इतना ही नहीं, आप dvd में लगे हुए bass और treble वाले mixer volume की मदद से गाने को और भी मधुर आवाज में सुन सकते हैं।

3) VCD और DVD को Microphone amplifier में भी बदल सकते हैं।

बहुत ही कम लोग ऐसा होंगे जो इस trick को जानते होंगे। दरअसल dvd और vcd में बिना कुछ बदलाव किये उसे माइक्रोफोन वाले एम्पलीफायर बाजा में भी बदला जा सकता है। इसके लिए आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है, बस आप एक अच्छे-से माइक का बंदोबस्त कर लें और नीचे बताये जा रहे तरीके से आप किसी भी dvd या vcd में इसका connection बहुत ही आसानी से कर सकते हैं।

सबसे पहले तो अपने mic से (+) और (-) वाला तार निकाल लें। इसके बाद आप अपने dvd या vcd के audio output वाले दोनों में से किसी एक सॉकेट से भी तार निकाल लें। बस आपको इसी तार में माइक के तार को जोड़ना है। एक बात का ध्यान रहे कि यदि आप माइक के तार को उलटे क्रम में जोड़ेंगे तो वो काम नहीं करेगा, इसलिए दुबारा से माइक को उल्टा जोड़कर भी एक बार try जरूर कर लीजियेगा।

4) अपने डीवीडी से मोबाइल भी चार्ज कर सकते हैं

हालांकि ऐसा हो ही नहीं सकता कि आपके पास आपके मोबाइल का चार्जर न हो, लेकिन संयोग से यदि कभी आपका charger खो जाये या फिर खराब हो जाए और मोबाइल switch off होने की स्थिति में आ जाये तो आप डीवीडी से भी अपने मोबाइल को चार्ज कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपके पास data cable का होना जरूरी है।

यदि डाटा केबल आपके पास मौजूद हो तो आप डीवीडी के usb port में उसे लगाकर उसके माध्यम से अपने mobile और smartphone को चार्ज कर सकते हैं। यहाँ एक बात का ध्यान रहे कि ये ऐसा आप आपातकालीन स्थिति में बहुत जरूरी पड़ने के बाद ही करें। हालांकि, इस तरह से मोबाइल चार्ज करने से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन यदि आपके डीवीडी में किसी तरह की शॉर्टिंग की कोई समस्या होगी तो आपका मोबाइल भी खराब हो सकता है।


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