About Us: ElectGuru वेबसाइट और एडमिन की कहानी

Hi guys, मेरा नाम आनंद कुमार है और मैं electguru.com का founder हूँ। मैं इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता हूँ और इस काम से अच्छी-खासी कमाई भी कर लेता हूँ। मैं बिहार राज्य का स्थायी निवासी हूँ और अभी ग्रेजुएशन कर रहा हूँ।
मैं एक मध्यम परिवार से हूँ और मेरे पिताजी एक किसान हैं। वो हमारी सफलता के लिए दिन-रात एक करके पूरी मेहनत करते हैं। खेती में किसी साल मुनाफा होता है तो किसी साल उन्हें नुकसान का सामना भी करना पड़ जाता है। इसके बावजूद भी उन्होंने मुझे पढाई करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा ही पूरी छूट दिया है। पैसे की तंगी होने के बावजूद भी उन्होंने कभी भी मुझे काम करने के लिए नहीं कहा और हमेशा मेरे सारे खर्च उठाते रहे हैं।

मेरी पढाई के बारे में

पिताजी की तरफ से मिले इसी सहयोग का नतीजा रहा कि मैं हमेशा ही अपने क्लास में फर्स्ट और सभी स्टूडेंट्स से हमेशा ही टॉप आता रहा। अपने टैलेंट और हुनर की बदौलत मैं हमेशा से ही सभी शिक्षकों का प्रिय रहा हूँ। इतना ही नहीं, 6th क्लास तक हमेशा ही मेरा क्रमांक 1 रहा है।

लेकिन पांचवी के बाद मैं लगातार बीमार रहने लगा और साथ ही एक और निजी बात की वजह से 7th में मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका था। लेकिन 8th क्लास में एक बार फिर से मैं फर्स्ट आया, लेकिन इस बार वर्ग में मेरा क्रमांक 2 था। लेकिन फिर इसके बाद मैट्रिक से लेकर ग्रेजुएशन तक मैं हमेशा ही फर्स्ट आता रहा हूँ।

हालांकि, हमेशा से ही मेरी रुचि सभी विषयों में रही थी लेकिन मेरा सबसे पसंदीदा विषय Mathematics रहा है। इस विषय में मैं इतना talented रहा हूँ कि मेरे प्राइवेट स्कूल के शिक्षक मुझसे test exam की कॉपी भी जंचवा लिया करते थे। इसके बाद मैं खुद उस कॉपी पर नंबर भी बैठाता था।

मेरे इतना सब करने के बाद मेरे टीचर भी एक बार इस कॉपी को जांच कर लेते थे। लेकिन उन्हें मेरे जांच करने में कोई कमी नहीं लगता था जिस वजह से वो उसमें बिना कुछ परिवर्तन किये ही उसी रिजल्ट को घोषित कर देते थे। इसके बाद धीरे-धीरे मेरा झुकाव पूरी तरह से इसी विषय में हो गया और इसका परिणाम ये है कि मेरा Honors का विषय भी Mathematics ही है।

रिपेयरिंग का काम मैंने कब शुरू किया?

मैंने हमेशा ही पढाई को ज्यादा महत्त्व दिया है और इसके बाद ही किसी दूसरे काम को। लेकिन पढाई के साथ-ही-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स के बारे में नई-नई जानकारियाँ पाने और इससे सम्बंधित काम करने के लिए भी मैं बचपन से ही उत्सुक रहा हूँ। शुरुआत में तो ये काम मैंने अपनी उत्सुकता की वजह से ही शुरू किया था लेकिन ज्यों-ज्यों इस काम में मेरी जानकारी बढ़ती गई, मैं इस क्षेत्र में माहिर होता गया और एक दिन ऐसा भी आया जब इस काम से मेरी थोड़ी-बहुत कमाई भी होने लगी।

शुरुआत में तो मेरे पिताजी मुझे बिजली के काम से दूर रहने को कहा करते थे, लेकिन जब उन्हें ये विश्वास हो गया कि ये काम करने से मेरे पढाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही मुझे कोई शारीरिक नुकसान होगा तब उन्होंने मुझे मना करना बंद कर दिया।

रिपेयरिंग का काम मैंने कहाँ से सीखा?

हालांकि, बचपन में मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान खरीदने में बहुत सारा पैसा लगा दिया था लेकिन इसके बावजूद भी रिपेयरिंग का काम मुझे सही से समझ नहीं आ रहा था। फिर इसके बाद मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न इलेक्ट्रॉनिक्स से सम्बंधित किताब खरीदूं ताकि इस काम को मैं जल्दी से समझ सकूं। लेकिन ये क्या, मैंने अपने एरिया के बहुत सारे बुक-स्टॉल में खोज लिया लेकिन किसी भी दुकान में मुझे मेरे काम की बुक नहीं मिली। इसके बाद जब मैंने एक दुकानदार से पूछा कि ये किताब मुझे कहाँ मिलेगी, तो उन्होंने कहा कि ऐसी किताबें तो दिल्ली में ही मिल सकती है।

इतना सुनने के बाद मैंने बुक खोजना बंद कर दिया और खुद से ही इसे समझने का मन बना लिया। लेकिन कुछ महीने बाद ही मेरे एक परिचित इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार इससे सम्बंधित कुछ किताब बेचने के लिए लाये। उनके पास करीब 50 से भी ज्यादा किताबें होंगी। मैंने चेक करके उनमें से कुछ महत्त्वपूर्ण किताब खरीद लिया और घर आकार उसे पढ़ा तो इलेक्ट्रॉनिक्स के सामानों और औजारों के बारे में मुझे काफी कुछ जानकारी हो गया।

बता दूं कि उन किताबों में सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों और मल्टीमीटर से ही सम्बंधित कुछ जानकारियाँ थीं। इन किताबों से मैंने बहुत कुछ सीखा, लेकिन इसकी सहायता से रिपेयरिंग का काम समझ पाना असंभव था। लेकिन मेरे लिए इतनी जानकारी भी काफी था। इतनी जानकारी के बाद ही मैं रिपेयरिंग के काम को अच्छे से समझ गया और खुद से ही छोटा-मोटा सर्किट डिजाइन भी करने लगा। इसके बाद धीरे-धीरे इसमें मेरी जानकारी और अनुभव बढ़ती गयी और मैं इस क्षेत्र में माहिर होता गया।

सच कहूँ तो मैंने कहीं भी रिपेयरिंग का कोर्स नहीं किया है। इलेक्ट्रिक क्षेत्र में मैं आज जो कुछ भी हूँ अपने हुनर और अपने पिताजी की तरफ से मिले सपोर्ट की बदौलत ही हूँ। हाँ, इतना मैं जरूर कहना चाहूँगा कि रिपेयरिंग के काम में यदि कहीं भी मुझे कोई समस्या आती थी तो मैं अपने एक परिचित मैकेनिक से मदद जरूर लेता था।

इलेक्ट्रॉनिक्स का वेबसाइट बनाने का विचार मेरे मन में कैसे आया?

जैसी कि सच्चाई है, किसी भी इंसान की जानकारी कभी भी पूरी नहीं होती है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही है और अभी भी बहुत सारी जानकारी मुझे नहीं है। लेकिन अपनी कमी को दूर करने और नई-नई जानकारी जुटाने में मैं हमेशा लगा रहता हूँ। इसी सिलसिले में एक दिन मैं इन्टरनेट पर कुछ खोज कर रहा था। खोज करने के दौरान गूगल पर मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स से सम्बंधित कुछ सर्च किया था, लेकिन वो जानकारी मुझे नेट पर कहीं भी नहीं मिली।

मुझे इस बात का बहुत ही दुःख हुआ कि नेट पर इलेक्ट्रॉनिक्स से सम्बंधित बहुत सारी जानकारियाँ उपलब्ध नहीं थी। ठीक इसी समय मुझे अहसास हुआ कि जब मेरे साथ ऐसी समस्या है तो तो पता नहीं और कितने लोगों को उनके काम की जानकारी नहीं मिल पाती होगी। एक बार तो मेरे मन में ये ख्याल आया कि मैं खुद अपना वेबसाइट बनाकर उस पर इलेक्ट्रॉनिक्स से सम्बंधित तरह-तरह की जानकारियाँ जरूरतमंद लोगों के साथ शेयर करूँ, लेकिन मैं ऐसा करने में लगभग असमर्थ था, क्योंकि मेरा मानना था कि वेबसाइट बनाने में बहुत ज्यादा पैसे खर्च होते हैं।

वेबसाइट बनाने में मेरे कितने पैसे खर्च हुए?

बहुत समय से मैं एक जोक्स वेबसाइट पर रेगुलर विजिट किया करता था। इस वेबसाइट के एडमिन जी ने अपने मित्र राहुल तिवारी जी के वेबसाइट का लिंक भी अपने वेबसाइट में जोड़ रखा था। राहुल जी इस वेबसाइट पर टेक्नोलॉजी से सम्बंधित नए-नए पोस्ट डालते थे। तो, एक दिन जब मैं जोक्स वाले साइट पर गया तो वहां पर मैंने राहुल जी के साइट के एक पोस्ट का लिंक देखा। उस पोस्ट का टाइटल कुछ इस तरह से था, "फ्री में वेबसाइट कैसे बनाएं".

ये वही समय था जब मेरे मन में वेबसाइट बनाने का विचार आया था। मेरे विचार से चूंकि वेबसाइट बनाने के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत थी, इसलिए मुझे देरी हो रही थी। लेकिन ज्योंही मैंने ये टाईटल पढ़ा तो बिना देरी किये उस पोस्ट को खोल लिया और पढ़ने बैठ गया। हालांकि, इन्टरनेट पर काम करना मेरे लिए सपने जैसा और बहुत ही मुश्किल भरा काम था, लेकिन राहुल जी ने इतनी सरलता से अच्छी-अच्छी जानकारियाँ शेयर की हुई थी कि उनकी सहायता से मैंने उसी दिन 23 अगस्त 2016 को अपना फ्री का वेबसाइट बना लिया।

मेरे पसंदीदा वेबसाइट के लिस्ट

मेरे पास रिपेयरिंग के बहुत काम आते थे और पढाई भी करनी पड़ती थी, इसलिए मैं वेबसाइट को सही से संभाल नहीं पा रहा था। वैसे भी मुझे वेबसाइट पर काम करने का पहले से कोई अनुभव नहीं था जिस वजह से लोगों को मेरे वेबसाइट के बारे में पता नहीं चल पा रहा था। साथ ही, उस समय मुझे सही से पोस्ट लिखना भी नहीं आता था जिस वजह से मेरा वेबसाइट एकदम ही बेकार लग रहा था। यही वजह रहा था कि मैंने अपना सारा विजिटर खो दिया और कुछ महीने तक वेबसाइट से दूर हो गया।

वेबसाइट से दूर मैं सिर्फ इसलिए हुआ था ताकि इससे सम्बंधित जरूरी जानकारियां जुटा सकूं। असल में इस दौरान मैंने रिपेयरिंग का काम करना कम कर दिया और पढाई के साथ-ही-साथ वेबसाइट से सम्बंधित जानकारियाँ नेट पर सर्च करने लगा। हालांकि, मुझे नेट पर सर्च करने की जरूरत शायद नहीं पड़ती, लेकिन उस समय राहुल जी अपने निजी काम की वजह से अपने वेबसाइट से दूर हो गए थे। उनके वापस आने का इन्तजार मुझसे नहीं हो पा रहा था, इसीलिए मैंने एक बार फिर से गूगल का सहारा लिया और उस पर वेबसाइट से सम्बंधित सर्चिंग करने लगा।

इस प्रक्रिया के दौरान मैंने बहुत सारे वेबसाइट पर बहुत तरह का पोस्ट पढ़ा। सभी पोस्ट से मुझे कुछ-न-कुछ नई जानकारी जरूर मिलती थी लेकिन 3 ही ऐसी वेबसाइट है जो मुझे राहुल जी के वेबसाइट जैसा लगा। राहुल जी के वेबसाइट के साथ-साथ यही 3 वेबसाइट ऐसा है जिससे मैं अब तक जुड़ा हुआ हूँ और इनका लगभग हरेक पोस्ट पढता हूँ। इन तीनों वेबसाइट से मुझे काफी हेल्प भी मिली है।

सबसे पहला साईट जुमे दीन खान जी का है जिन्होंने जुलाई 2015 को अपना वेबसाइट बनाया था। जुमे दीन जी इस वेबसाइट पर इंटरनेट के साथ-ही-साथ बहुत तरह के शिक्षाप्रद पोस्ट शेयर करते हैं। उनका हरेक पोस्ट नया और जानकारी से भरा हुआ होता है।

इसके बाद मैं रोहित मेवाड़ा जी के वेबसाइट पर गया। इस वेबसाइट पर भी बहुत तरह की नई-नई जानकारियाँ शेयर की जाती हैं। इतना ही नहीं, रोहित जी ने ये वेबसाइट जुमे दीन जी से भी पहले बनाया था। साथ ही, खुद जुमे दीन जी भी इनके जूनियर रह चुके हैं।

इसके बाद मैं एक दिन एक दूसरे वेबसाइट पर गया। इस वेबसाइट के एडमिन का नाम भी रोहित पटेल है। इनके पोस्ट को पढकर भी मुझे बहुत हेल्प मिली है और ये वेबसाइट भी मुझे काफी पसंद आया।

इन वेबसाइट पर जाने के बाद भी मैं राहुल जी के वेबसाइट को कभी भी नहीं भूला और आज भी मैं उनके सभी पोस्ट को पढता हूँ। इनके वेबसाइट से मुझे इतना कुछ मिला है जिसके बारे में मैं कभी सोच भी नहीं सकता था। Finally, मेरा वेबसाइट आज जिस मुकाम पर है, हमारे इन्हीं सभी सीनियर के बदौलत ही है।