इमरजेंसी लाइट का चार्जर सर्किट कैसे बनाये?

इमरजेंसी लाइट एक ऐसा उपकरण है जो आजकल हरेक घरों में देखा जा सकता है। आज के समय में लगभग सभी लोग रात में अपने घर को उजाला करने के लिए इमरजेंसी लाइट का इस्तेमाल करते होंगे। आप भी अपने घर में इसका इस्तेमाल जरूर करते होंगे।

यदि आप भी इमरजेंसी लाइट का उपयोग करते हैं तो कभी-न-कभी वो ख़राब जरूर हुआ होगा। खराब इमरजेंसी लाइट को आपने किसी इलेक्ट्रिकल मैकेनिक से रिपेयरिंग भी जरूर करवाया होगा। कोई भी मैकेनिक इसे ठीक करने के लिए आपसे 50 रुपया मेहनताना और ख़राब सामान का पैसा अलग से भी वसूल लेते होंगे।

लेकिन यदि आप इलेक्ट्रिसिटी में इंटरेस्टेड हैं और इलेक्ट्रिकल रिपेयरिंग का भी थोडा-बहुत काम कर लेते हैं तो क्या आप इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट बनाने का तरीका जानते हैं? क्या आप जानते हैं इमरजेंसी लाइट का चार्जर कैसे बनाते हैं? क्या आप जानते हैं इमरजेंसी लाइट का चार्जर कैसे बनाया जाता है?

यदि आप इमरजेंसी लाइट का चार्जर बनाने की विधि नहीं जानते हैं और जानना चाहते हैं कि इमरजेंसी लाइट का चार्जर कैसे बनाये तो इस पोस्ट को जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम इमरजेंसी लाइट का चार्जिंग सर्किट बनाने की पूरी जानकारी हिंदी में देने जा रहे हैं और साथ ही इमरजेंसी लाइट चार्जर सर्किट डायग्राम भी पेश करने जा रहे हैं।

Emergency light battery charging circuit

सिंपल इमरजेंसी लाइट सर्किट कंपोनेंट्स के लिस्ट

एक सिंपल इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में इस्तेमाल होने वाले सभी कंपोनेंट्स के लिस्ट नीचे बताये दिए जा रहे हैं। यदि आप खुद से सिंपल इमरजेंसी लाइट किट सर्किट बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले नीचे बताये जा रहे सभी मटेरियल एक साथ जमा कर लें।

1) Charging LED; चार्जिंग एलईडी

किसी भी समय, इमरजेंसी लाइट चार्ज हो रहा है या नहीं, इस बात का पता लगाने के लिए emergency light charging circuit में एक छोटा-सा एलईडी बल्ब लगाया जाता है जो आमतौर पर लाल रंग में प्रकाश करता है। इस एलईडी बल्ब का कनेक्शन आप नीचे पेश किए जा रहे emergency light charger circuit diagram में समझ सकते हैं।

2) PF capacitor; इमरजेंसी लाइट का पीएफ केपेसिटर

एक सिंपल इमरजेंसी लाइट के चार्जिंग सर्किट में पीएफ केपेसिटर का सबसे अहम रोल होता है। सबसे पहले इलेक्ट्रिक ऊर्जा को पीएफ के अन्दर स्टोर किया जाता है और फिर इसके साथ ही पीएफ से ही बैटरी चार्जिंग के लिए जरूरी ऊर्जा का इस्तेमाल स्वतः किया जाता है। बैटरी के Ah के आधार पर emergency light capacitor पीएफ का चुनाव किया जाता है।

एक सामान्य emergency light battery charging circuit में 105K या 105J पीएफ केपेसिटर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यहाँ एक बात का ध्यान रहे कि यदि इमरजेंसी लाइट में लगे हुए 4 वोल्ट बैटरी की कैपेसिटी 1Ah, 1.5Ah या 2Ah है तभी 105K का पीएफ काम करेगा।

लेकिन यदि इमरजेंसी लाइट का बैटरी 2.5Ah या इससे भी ज्यादा का है तो आपको पीएफ भी 105K से ज्यादा का लेना होगा। अर्थात 2Ah से ज्यादा कैपेसिटी के बैटरी के लिए आपको जरूरत के अनुसार 155k, 225K इत्यादि वैल्यू का पीएफ लेना पड़ेगा।


3) Resistance: इमरजेंसी लाइट सर्किट का प्रतिरोध

इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में 2 रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

I) पीएफ केपेसिटर के साथ रेजिस्टेंस का इस्तेमाल

इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में पीएफ केपेसिटर के समानांतर क्रम में एक प्रतिरोध लगाया जाता है। इस प्रतिरोध की वैल्यू भी ठीक पीएफ केपेसिटर के जितना ही होता है। उदाहरण के लिए, इमरजेंसी लाइट चार्जिंग बोर्ड में यदि 105K या 105J वैल्यू का पीएफ केपेसिटर लगा है तो इसी केपेसिटर के समानांतर क्रम में 105K वैल्यू का एक रेजिस्टेंस लगाया जायेगा।

II) चार्जिंग एलईडी के साथ रेजिस्टेंस का इस्तेमाल

किसी भी समय में इमरजेंसी लाइट के चार्जिंग सर्किट के किसी भी पॉइंट पर 4 वोल्ट से लेकर 220 वोल्ट तक करंट मौजूद रहता है। कहने का तात्पर्य ये है कि पूरे सर्किट में कहीं भी 4 वोल्ट से कम सप्लाई मौजूद नहीं होता है जबकि, चार्जिंग एलईडी को सिर्फ 2.5 वोल्ट से लेकर 3 वोल्ट तक सप्लाई की ही जरूरत होती है।

इसलिए चार्जिंग एलईडी तक जरूरत के जितना ही सप्लाई पहुँचाने के लिए एक रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है। इस रेजिस्टेंस को एलईडी बल्ब के परिपथ में सीरीज क्रम में लगाया जाता है। एक सामान्य इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में 200Ω से लेकर 1000Ω अर्थात 1 किलो ओह्म्स तक के रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

4) Diode: इमरजेंसी लाइट का डायोड

पीएफ केपेसिटर का काम 220V AC को बैटरी के जरूरत के अनुसार ऊर्जा प्रदान करना है। लेकिन इसका आउटपुट भी एसी में ही होता है जबकि बैटरी को चार्ज करने के लिए डीसी सप्लाई की जरूरत होती है।

इसलिए पीएफ के आउटपुट एसी को डीसी में बदलने के लिए full wave bridge rectifier युक्ति का इस्तेमाल किया जाता है जिसके लिए 4 पीस डायोड का प्रयोग होता है। सामान्यतः किसी भी इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट में 4 पीस IN 4007 डायोड का इस्तेमाल किया जाता है।

5) Filter Capacitor for bridge rectifier: फुल वेव ब्रिज रेक्टिफायर में फ़िल्टर केपेसिटर का इस्तेमाल

आमतौर पर किसी भी emergency light battery charging circuit में रेक्टिफायर के आउटपुट डीसी में बैटरी को डायरेक्ट चार्ज में लगा दिया जाता है और उससे बैटरी भी सही से चार्ज होता है। इसलिए यदि आप चाहें तो अपने सर्किट को बिना फ़िल्टर केपेसिटर के भी बना सकते हैं लेकिन इससे आपके बैटरी खराब होने की संभावना बनी रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि डायोड के आउटपुट डीसी में भी एसी करंट का कुछ अंश मौजूद रहता है।

इसलिए इस शंका से निबटने के लिए डायोड के आउटपुट के समानांतर क्रम में एक फ़िल्टर केपेसिटर लगाया जा सकता है। अर्थात डायोड के आउटपुट डीसी के (+) में केपेसिटर का (+) और, (-) में केपेसिटर का (-) लगाया जायेगा। आमतौर पर इस केपेसिटर की वैल्यू 470μf में 50V होती है। लेकिन आप लगभग इतने मान के ही दुसरे वैल्यू के केपेसिटर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, या फिर चाहें तो बिना फ़िल्टर केपेसिटर के भी चार्जिंग सर्किट बना सकते हैं।


इमरजेंसी लाइट के चार्जर का सर्किट डायग्राम

ऊपर आपने जान लिया है कि इमरजेंसी लाइट बैटरी चार्जिंग सर्किट बनाने के लिए किस-किस कंपोनेंट्स की जरूरत पड़ेगी। तो चलिए अब इमरजेंसी लाइट चार्जिंग सर्किट डायग्राम देखते हैं।

Emergency light charging circuit

ऊपर का डायग्राम आपको तभी समझ आएगा जब आप इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स की थोड़ी-बहुत बेसिक बातों को जानते होंगे। यदि आप ऊपर के डायग्राम को नहीं समझ पाए हैं तो चलिए अब emergency light charger circuit diagram के सिम्पल फोटो के माध्यम से इन सभी कंपोनेंट्स के आपसी कनेक्शन को समझते हैं। इस सर्किट में ट्रांसफार्मर की जरूरत नहीं पड़ती है अर्थात ये सर्किट emergency light circuit diagram without transformer सर्किट कहलाता है।

Emergency light circuit diagram without transformer

ऊपर के चार्जिंग डायग्राम में आप निम्नलिखित बातों को देख सकते हैं।

  1. सबसे पहले बैटरी कैपेसिटी के अनुसार एक पीएफ केपेसिटर का चयन किया गया है।
  2. जितने K का pf लिया गया है उतने ही K (किलो ओह्म्स) का एक रेजिस्टेंस ले लिया गया है।
  3. पीएफ और रेजिस्टेंस को आपस में समानांतर क्रम (पैरेलल क्रम) में जोड़ दिया गया है।
  4. पीएफ के एक पिन पर 220 वोल्ट एसी का सप्लाई दे दिया गया है।
  5. पीएफ के दूसरे पिन पर बैटरी के लिए जरूरी चार्ज मिल रहा है।
  6. दूसरी तरफ, 4 पीस IN4007 डायोड की सहायता से चित्र में दर्शाए अनुसार एक फुल वेव ब्रिज रेक्टिफायर बना लिया गया है।
  7. इस रेक्टिफायर में डायोड का आपस में कनेक्शन करने पर इस तरह से 4 पॉइंट • बन रहे हैं। (- +), (- -), (+ -) और (+ +).
  8. (+ -) और (- +) वाले दोनों पॉइंट पर सप्लाई दे दिया गया है अर्थात, एक पॉइंट पर पीएफ के बचे हुए एक पिन का कनेक्शन कर दिया गया है और दुसरे पॉइंट पर बचे हुए एसी सप्लाई वाला कनेक्शन कर दिया गया है।
  9. फिर इसके बाद रेक्टिफायर को सप्लाई मिलने लगता है और वो (+ +) और (- -) वाले पॉइंट पर आउटपुट देने लगता है।
  10. यदि आप चाहें तो इसी आउटपुट पॉइंट पर 470μf में 50 वोल्ट या 100 वोल्ट का फ़िल्टर केपेसिटर भी जोड़ सकते हैं। लेकिन साथ ही इसी पॉइंट पर बैटरी का कनेक्शन भी किया जायेगा।
  11. नोट:- एक बात का ध्यान रहे कि यहाँ पर बैटरी का कनेक्शन डायोड के (+) और (-) के अनुसार उल्टा होगा अर्थात रेक्टिफायर के (- -) वाले पॉइंट पर बैटरी और केपेसिटर दोनों का (+) वाला पिन लगेगा और (+ +) वाले पॉइंट पर बैटरी और केपेसिटर दोनों का (-) वाला पिन लगेगा।
  12. अब बचा सिर्फ चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन करना तो, इमरजेंसी लाइट चार्जिंग किट सर्किट में चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन करने में कुछ कंफ्यूजन है, इसलिए चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।


इमरजेंसी लाइट सर्किट का चार्जिंग एलईडी हमेशा जलता क्यों रहता है?

बहुत बार लोग जब खुद से कोई चार्जिंग सर्किट बनाते हैं या किसी ख़राब चार्जर की रिपेयरिंग करते हैं तो वो रिपेयरिंग करने के दौरान एक गलती कर देते हैं। दरअसल वो चार्जिंग एलईडी के सीरीज में रेजिस्टेंस तो लगा देते हैं लेकिन रेजिस्टेंस सहित उस चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन उल्टा कर देते हैं।

दरअसल बहुत सारे कम जानकार मैकेनिक चार्जिंग एलईडी को सीधे चार्जर के आउटपुट पर अर्थात (+ +) और (- -) वाले पॉइंट पर जोड़ देते हैं। अब चूँकि इसी पॉइंट पर बैटरी का कनेक्शन किया जाता है इसलिए जब चार्जर में सप्लाई नहीं दिया रहता है तब भी उस पॉइंट पर बैटरी का सप्लाई मौजूद रहता है जिस वजह से बिजली कट जाने के बाद भी चार्जर का चार्जिंग एलईडी जलता रहता है।

तो अब सवाल ये उठता है कि आखिर चार्जिंग एलईडी की वायरिंग किस प्रकार से करें कि वो सिर्फ चार्ज होते समय ही जले, जब चार्जिंग ऑफ हो तो चार्जिंग एलईडी न जले? तो नीचे बताये जा रहे 5 तरीकों में से आप किसी भी तरीके से चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि सभी स्थितियों में ही चार्जिंग एलईडी के सीरीज क्रम में 1KΩ का रेजिस्टेंस लगा रहना जरूरी है।

  1. ब्रिज रेक्टिफायर के (+ -) और (- +) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। इस स्थिति में एलईडी को उल्टा-सीधा किसी भी तरह से लगाया जा सकता है।
  2. ब्रिज रेक्टिफायर के (+ +) और (+ -) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी की वायरिंग कर सकते हैं। इस स्थिति में (+ +) पर एलईडी का नेगेटिव सिरा अर्थात (-) लगेगा।
  3. रेक्टिफायर के (+ +) और (- +) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। इस स्थिति में भी (+ +) पर एलईडी का (-) ही जायेगा।
  4. रेक्टिफायर के (- -) और (- +) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। इस कंडीशन में (- -) वाले पॉइंट पर एलईडी का (+) लगेगा।
  5. रेक्टिफायर के (- -) और (+ -) वाले पॉइंट पर चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन कर सकते हैं। इस स्थिति में भी (- -) वाले पॉइंट पर एलईडी का (+) सिरा ही लगेगा।

ऊपर बताये गए 5 तरीकों से स्पष्ट है कि ब्रिज रेक्टिफायर के माध्यम से आउटपुट वाले चार्जर में चार्जर एलईडी का कनेक्शन या तो इनपुट वाले दोनों पॉइंट पर उल्टा-सीधा किसी भी प्रकार से किया जा सकता है। उल्टा-सीधा का मतलब ये है कि यहाँ पर (+) और (-) की कोई दिक्कत नहीं है।

या फिर, एलईडी के एक पिन का कनेक्शन ब्रिज रेक्टिफायर के इनपुट वाले किसी भी पॉइंट पर और दुसरे पिन का कनेक्शन रेक्टिफायर के आउटपुट वाले किसी भी पॉइंट पर किया जा सकता है।

लेकिन यहाँ पर एक बात का ध्यान रहे कि जिस आउटपुट पॉइंट पर आपने चार्जिंग एलईडी का कनेक्शन किया है यदि उस आउटपुट पॉइंट पर बैटरी का (+) लगा है तो वहां एलईडी का भी (+) वाला पिन ही आएगा। लेकिन यदि चार्जिंग एलईडी के कनेक्शन पॉइंट पर बैटरी का (-) लगा होगा तो वहां पर एलईडी का भी (-) वाला पिन ही लगेगा।

नोट:- 1) ब्रिज रेक्टिफायर के (- -) वाले पॉइंट पर हमेशा बैटरी और चार्जिंग एलईडी दोनों का (+) लगेगा; और साथ ही (+ +) पर हमेशा ही बैटरी और चार्जिंग एलईडी दोनों का (-) ही लगेगा। लेकिन चार्जिंग एलईडी के किसी एक पिन का ही कनेक्शन आउटपुट वाले पॉइंट से किया जायेगा।

2) (-) को कैथोड (Cathode) और; (+) को एनोड (Anode) कहा जाता है।


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